डिंडौरी। जिले में लंबे समय से भटक रहे विक्षुप्त व्यक्तियों के संरक्षण और उपचार की दिशा में जिला प्रशासन ने एक सराहनीय पहल की है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया एवं पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह के विशेष प्रयासों से ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षित संरक्षण प्रदान कर उनके इलाज की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
इसी क्रम में ग्राम पंचायत पिपरिया, विकासखंड शहपुरा की मूल निवासी विक्षुप्त महिला बसंती वरकडे, जो पिछले 13 वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं और बिना बताए घर से चली जाया करती थीं, को कपिलधारा आश्रम, अमरकंटक से खोजकर सुरक्षित लाया गया। वर्तमान में उन्हें नर्मदा वृद्धा आश्रम, साकेत नगर (डिंडौरी) में रखा गया है, जहाँ उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अलावा ग्राम पंचायत छांटा, विकासखंड डिंडौरी के स्थायी निवासी ईश्वर प्रसाद (उम्र 36 वर्ष), जो विवाहित हैं और एक 8 वर्षीय बच्चे के पिता हैं, मानसिक अस्वस्थता के कारण परिजनों से विवाद कर घर छोड़ देते थे। उन्हें भी आम रास्ते से खोजकर सुरक्षित रूप से आश्रम में रखा गया है। वहीं एक अन्य लगभग 38 वर्षीय अज्ञात विक्षुप्त महिला, जो बोलने में असमर्थ हैं और जिनके परिवार अथवा गांव की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, को भी संरक्षण में लिया गया है।
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन एवं पुलिस अधीक्षक वाहनी सिंह के समन्वित प्रयासों से तीनों विक्षुप्त व्यक्तियों को जिले के विभिन्न स्थानों से सुरक्षित लाकर नर्मदा वृद्धा आश्रम, साकेत नगर में रखा गया। 07 जनवरी 2026 को कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने स्वयं आश्रम पहुँचकर विक्षुप्तों से संवाद किया। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, आश्रम की संस्थापिका विनीता मनीष पाण्डेय, रूपाली रितेश जैन सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। दो विक्षुप्तों के परिजन भी मौके पर मौजूद रहे, जिनसे विस्तृत जानकारी ली गई।
परिवारजनों की सहमति से उपचार हेतु एनजीओ ‘प्रभूजी सेवा संस्था’, डबरा (ग्वालियर) के माध्यम से आगे की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है। संस्था के संचालक डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौर ने बताया कि संस्था विगत आठ वर्षों से निरंतर ऐसे विक्षुप्त व्यक्तियों का उपचार कर उन्हें स्वस्थ कर उनके परिवारों से पुनर्मिलन कराती आ रही है। यह व्यवस्था सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी के विशेष प्रयासों से संभव हो सकी, जिनके द्वारा संस्था को डबरा से आमंत्रित किया गया।
कलेक्टर ने स्वयं परिवारजनों एवं संस्था के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा कर शपथ पत्र एवं सहमति पत्र के आधार पर विक्षुप्तों के सुरक्षित और निःशुल्क आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की। उपचार के दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य को भी जाने की अनुमति दी गई है। यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे विक्षुप्त व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन, बेहतर उपचार और परिवार से पुनर्मिलन का अवसर प्राप्त होगा।




