Dindori News : मनरेगा श्रमिकों को हर हाल में मिले काम, जिले में विकास कार्यों में लाएं तेज़ी : कलेक्टर

Rathore Ramshay Mardan
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डिंडौरी। जिले में श्रमिकों के लिए मनरेगा को आधारशिला बताते हुए कलेक्टर भदौरिया ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी पंजीकृत श्रमिकों को अनिवार्य रूप से कार्य उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही मनरेगा एवं विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति को गति देने पर जोर दिया गया।

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित मनरेगा एवं विकास कार्यों की प्रगति समीक्षा बैठक में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलेभर में संचालित योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, अतिरिक्त सीईओ पंकज जैन, डिप्टी कलेक्टर वैधनाथ वासनिक, एसडीएम बजाग रामबाबू देवांगन सहित जनपद पंचायतों के सीईओ, यंत्री, सहायक यंत्री एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान जल गंगा संवर्धन अभियान, सार्वजनिक तालाब, खेत तालाब, डगवेल रिचार्ज, अमृत सरोवर, आंगनवाड़ी केंद्र, चेकडेम, मां की बगिया, तार फेंसिंग, बाउंड्रीवाल, पुलिया, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब मरम्मत, सीसी रोड सहित अन्य विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने भुगतान संबंधी लंबित प्रक्रियाएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित हो सके।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में चल रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों को चिन्हांकित कर सिपरी एप के माध्यम से दर्ज किया जाए, जिससे टिकाऊ एवं उपयोगी संरचनाओं का निर्माण संभव हो सके। इसके लिए सभी जनपद सीईओ एवं मैदानी अमले को आवश्यक प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए। नर्मदा परिक्रमा पथ एवं आश्रय स्थलों पर मनरेगा मद से फेंसिंग कार्य उपयुक्त स्थलों पर कराने के निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में ही तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृतियां जारी कर कार्य प्रारंभ कराए जाएं, ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण हो सकें। इसके लिए वाटर मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया गया।

बैठक के अंत में कलेक्टर ने यंत्री, सहायक यंत्री, जनपद सीईओ एवं कार्यपालन यंत्री आरईएस को निर्देशित किया कि जिले में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों से संबंधित सभी तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति के प्रकरण एक सप्ताह के भीतर पूर्ण किए जाएं, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके और श्रमिकों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

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