मंडला। ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन (TWTA) का प्रतिनिधिमंडल 7 अप्रैल को राज्यपाल से मुलाकात कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से राहत की मांग करेगा। संगठन के प्रांताध्यक्ष डी.के. सिंगोर के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएगा।
एसोसिएशन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद प्रदेश के लगभग 1.60 लाख शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बन गई है। इनमें करीब 45 हजार शिक्षक जनजातीय कार्य विभाग से जुड़े हैं, जो इस निर्णय से विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। न्यायालय के आदेश के तहत TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है और इसके लिए दो वर्ष की समय-सीमा निर्धारित की गई है। तय अवधि में परीक्षा उत्तीर्ण न करने पर सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान भी किया गया है।
इसी कड़ी में संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से जनजातीय कार्य विभाग के शिक्षकों को TET परीक्षा से पूर्णतः मुक्त करने या आवश्यक शिथिलता प्रदान करने की मांग करेगा। संगठन का कहना है कि जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक, सामाजिक और भाषाई परिस्थितियां अलग हैं, जहां स्थानीय शिक्षक ही प्रभावी ढंग से शिक्षा दे पा रहे हैं।
इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश सरकार की मंत्री संपतिया उइके महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे इस मुलाकात में सेतु का कार्य करेंगी। जानकारी के अनुसार, मंत्री उइके ने महामहिम राज्यपाल कार्यालय से इस मुलाकात के लिए अनुमति भी प्राप्त कर ली है। साथ ही वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भी भेंट कर जनजातीय कार्य विभाग के शिक्षकों की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे जनजातीय क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
