— पुराने शिक्षकों पर TET की नई शर्त, 13 मार्च को प्रदेशभर में विरोध
जनधारा न्यूज डेस्क। संचालक लोकशिक्षण भोपाल द्वारा जारी किए गए उस आदेश को लेकर प्रदेश भर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है, जिसमें लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को भी आगे सेवा जारी रखने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य बताया गया है। इस आदेश के विरोध में शासकीय शिक्षक संगठन ने 13 मार्च को पूरे मध्यप्रदेश में जिला स्तर पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।
शासकीय शिक्षक संगठन के अनुसार, संचालक लोकशिक्षण द्वारा यह आदेश विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया है, जिससे शिक्षक संवर्ग में भारी रोष व्याप्त है। संगठन का कहना है कि कई शिक्षक 20 से 27 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और अब उनसे TET परीक्षा पास करने की शर्त रखना उनके साथ अन्याय है।
शासकीय शिक्षक संगठन के प्रांताध्यक्ष राकेश दुबे ने इस मामले में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव विधि, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग तथा आयुक्त लोकशिक्षण भोपाल को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित कराया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अधिकांश शिक्षक शिक्षाकर्मी एवं संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त होकर सेवा में आए हैं और उनकी नियुक्तियां उस समय लागू नियमों के आधार पर की गई थीं।
संगठन का कहना है कि शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1997, शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम 1998, अध्यापक भर्ती अधिनियम 2008 तथा राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2018 में कहीं भी TET परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त का उल्लेख नहीं किया गया था। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

संगठन ने यह भी तर्क दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इधर शासकीय शिक्षक संगठन के जिला अध्यक्ष रामकुमार गर्ग ने मांग की है कि इस आदेश को तत्काल वापस लिया जाए और मध्यप्रदेश सरकार शिक्षकों के हित में सर्वोच्च न्यायालय में TET के संबंध में पुनर्विचार याचिका दायर करे। उन्होंने बताया कि 13 मार्च को जिले सहित पूरे प्रदेश में शिक्षक जिला स्तर पर एकत्र होकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे और इस आदेश का विरोध दर्ज कराएंगे।




