भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री जनसेवा मित्रों की समस्याओं को लेकर विधानसभा में मामला गूंजा है। क्षेत्र क्रमांक 105 से विधायक नारायण सिंह पट्टा ने नियम 138(1) के तहत विधानसभा में ध्यान आकर्षण सूचना प्रस्तुत कर सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है।
विधायक पट्टा ने बताया कि प्रदेश में शासकीय योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से लगभग 9300 शिक्षित युवाओं को मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र के रूप में सेवा में रखा गया था। नियुक्ति के समय इन्हें 8000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की घोषणा की गई थी, लेकिन वर्ष 2023-24 के विधानसभा चुनाव के बाद से इन जनसेवा मित्रों की लगातार अनदेखी हो रही है। उन्होंने कहा कि मानदेय एवं भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण ये सभी 9300 शिक्षित युवा गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। स्थिति यह है कि इन युवाओं के सामने अपनी जीविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है और वे मानसिक रूप से भी अत्यधिक तनाव में हैं।

विधायक ने यह भी उल्लेख किया कि अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री जनसेवा मित्रों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं, बावजूद इसके अब तक उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया गया है। इससे न सिर्फ जनसेवा मित्रों में बल्कि उनके परिजनों में भी सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विधायक नारायण सिंह पट्टा ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि इस विषय को अविलंबनीय सार्वजनिक महत्व का मानते हुए सदन में उठाने की अनुमति प्रदान की जाए, ताकि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर ठोस निर्णय ले सके।
