— स्कूल के लिए आरक्षित नगर निगम की 1.212 एकड़ जमीन को निजी बताकर 3.90 करोड़ में बेचा, महिला के प्लॉट पर फर्जी दावेदार खड़े कर 1.10 करोड़ में सौदा कराने का आरोप
भोपाल। पटेल नगर कॉलोनी में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित करोड़ों रुपये की जमीन को कथित रूप से हड़पकर बेचने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने कॉलोनाइजर कंपनी मेसर्स गंधर्व लैंड एंड फायनेंस प्रा.लि. के निदेशक सहित पांच नामजद आरोपियों और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 229(2), 316(5) एवं 318(2) के तहत अपराध क्रमांक 91/2026 दर्ज किया गया है।
जांच में सामने आया कि पटेल नगर कॉलोनी ग्राम हयातखेड़ा/खजूरी खुर्द, रायसेन रोड पर करीब 90 एकड़ जमीन पर विकसित की गई थी। कॉलोनी के स्वीकृत नक्शे में स्कूल, पार्क और अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ी गई जमीन नगर निगम की बताई गई थी। जांच के अनुसार कंपनी को इन जमीनों पर कभी मालिकाना हक प्राप्त नहीं हुआ। वर्ष 1962 के डायवर्जन आदेश और वर्ष 1999 में नगर निगम के साथ हुए एग्रीमेंट में भी स्पष्ट उल्लेख था कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर नगर निगम का अधिकार रहेगा।
जांच के मुताबिक कंपनी के पूर्व संचालक की मृत्यु के बाद उनके पुत्र अनुज ग्रोवर कंपनी के निदेशक बने। आरोप है कि उनके कार्यकाल में स्कूल के लिए आरक्षित 1.212 एकड़ सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर 27 नवंबर 2024 को जय प्रताप सिंह यादव और अभिषेक आनंद को 3.90 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। जांच में यह भी पाया गया कि उक्त जमीन स्कूल और कॉलोनी की सार्वजनिक जरूरतों के लिए आरक्षित थी।
महिला के प्लॉट पर भी फर्जी दावेदार खड़े करने का आरोप
जांच में कॉलोनी के एक अन्य मामले का भी खुलासा हुआ। वर्ष 1978 में एक महिला ने प्लॉट क्रमांक ई-12 का पंजीयन कराया था और निर्धारित राशि कंपनी को किस्तों में चुका दी थी। इसके बावजूद कंपनी ने सड़क-सीवर का काम बाकी होने का हवाला देते हुए वर्षों तक रजिस्ट्री नहीं की। रजिस्ट्री नहीं मिलने पर महिला के परिवार ने उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया, जहां आयोग ने कंपनी को ब्याज सहित राशि लौटाने के आदेश दिए।
जांच के अनुसार परिवार ने राशि वापस लेने के बजाय अपना प्लॉट लेने की इच्छा जताई और मामला उच्च स्तर तक पहुंचा। इसी दौरान कंपनी के निदेशक ने कथित तौर पर उसी प्लॉट पर दो फर्जी दावेदार खड़े कर सिविल कोर्ट में विवाद खड़ा किया। बाद में इन्हीं कथित फर्जी दावेदारों से समझौता कर वास्तविक आवंटी की जानकारी छिपाते हुए प्लॉट मनीष नायक और प्रेमानंद नायक को 1.10 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
कुआं पाटकर जमीन बेचने का भी मामला सामने आया
EOW की जांच में कॉलोनी में पानी की सप्लाई के लिए बनाए गए तीन कुओं में से एक कुएं को पाटकर उस स्थान की जमीन बेचने का मामला भी सामने आया है। जांच में पाया गया कि कंपनी ने कॉलोनी में सड़क, सीवर, नाली और पार्क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह विकसित नहीं कीं, जिसके कारण रहवासियों को लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन को स्कूल के लिए आरक्षित रखा गया था, उसे खरीदने के बाद अब उस पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति लेने के प्रयास किए जा रहे थे। जांच एजेंसी के अनुसार यह जमीन बच्चों की शिक्षा और कॉलोनी की सार्वजनिक जरूरतों के लिए सुरक्षित रखी गई थी, लेकिन कथित तौर पर निजी लाभ के लिए उसका विक्रय कर दिया गया।
नगर निगम ने भी जताई थी आपत्ति
सरकारी जमीन के विक्रय की जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम भोपाल ने समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके अलावा शासन स्तर की समीक्षा बैठक में भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
EOW के अनुसार दोनों मामलों को मिलाकर करीब पांच करोड़ रुपये की सरकारी एवं आरक्षित संपत्ति को गलत तरीके से बेचने का प्रथमदृष्टया मामला सामने आया है। जांच के आधार पर कंपनी के निदेशक अनुज ग्रोवर सहित पांच नामजद आरोपियों और अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।
