डिंडौरी। जिले में इन दिनों मेहनत के पसीने की कीमत चार महीनों से अटकी पड़ी है और मनरेगा मजदूर खाली जेब, टूटते हौसले और बढ़ती मजबूरी के साथ दिन काटने को मजबूर हैं। जिले में 42 करोड़ रुपये से अधिक की लंबित मजदूरी ने हजारों गरीब परिवारों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। इसी पीड़ा और आक्रोश को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया।
चंद्रविजय महाविद्यालय तिराहा पर हुए धरना-प्रदर्शन में मजदूरों की आंखों में दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा था। नारेबाजी के बीच यह सवाल बार-बार गूंजता रहा कि जब मजदूरों ने काम पूरा कर दिया तो उनकी मजदूरी अब तक क्यों नहीं मिली। विधायक मरकाम ने बताया कि उन्होंने पूर्व में कलेक्टर को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर 12 फरवरी तक भुगतान की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि समय पर मजदूरी नहीं मिली तो आंदोलन किया जाएगा, लेकिन तय तारीख गुजर जाने के बाद भी सरकार ने मजदूरों की सुध नहीं ली।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 12 फरवरी 2026 की स्थिति में जिले की लंबित मनरेगा मजदूरी 44 करोड़ 39 लाख 11 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही जनमन आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि भी पिछले छह महीनों से लंबित है, जिससे गरीब हितग्राही दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर मजदूरी नहीं मिल रही, दूसरी ओर आवास योजना की किश्त अटकी होने से उनके सपनों का घर भी अधूरा पड़ा है।
भुगतान न होने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चंद्रविजय महाविद्यालय तिराहा से पुरानी डिंडौरी चौराहा तक रैली निकाली। रैली के दौरान केंद्र की भाजपा सरकार और प्रदेश की मोहन यादव सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए। विरोध के प्रतीक स्वरूप कार्यकर्ताओं ने नगर के दुकानदारों से मजदूरों की मजदूरी भुगतान के लिए भीख मांगी। इस प्रतीकात्मक भीख से जुटाई गई 5300 रुपये की राशि एडीएम और एसडीएम को सौंपते हुए सरकार की संवेदनहीनता पर करारा तंज कसा गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि चार महीनों से मजदूरों को उनकी मेहनत की मजदूरी नहीं मिल पाई है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट में हैं। जिले में मेला-मड़ई का दौर चल रहा है और 15 फरवरी को महाशिवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक पर्व आने वाले हैं, लेकिन मजदूरों के पास त्योहार मनाने तक के लिए पैसे नहीं हैं। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि मजदूरी भुगतान की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन की अनुमति तक नहीं दी गई, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मनरेगा मजदूरी और आवास योजनाओं की लंबित राशि का भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने सरकार पर मजदूरों और गरीब हितग्राहियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी मजदूरों के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी। बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि डिंडौरी में मजदूरों का यह दर्द अब दबने वाला नहीं है।


