मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी द्वारा जनपद पंचायत समनापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत अजगर में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर पाँच दिनों में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, किंतु निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि 30 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि शिकायतों की बिंदुवार जांच कर निर्धारित अवधि के भीतर रिपोर्ट दी जाए, फिर भी आज लगभग एक माह से अधिक समय बीत चुका है, और जांच दल द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जहाँ एक ओर लाखों की सरकारी राशि में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर जांच अधिकारी भी निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं कर रहे। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भ्रष्टाचार करने वालों को न तो नियमों का भय है और न ही भ्रष्टाचार की जांच करने वाले अधिकारियों में जिम्मेदारी का भाव दिखाई दे रहा है।
— पूर्व में प्रकाशित खबर के बाद हुए थे जांच आदेश
ग्राम पंचायत अजगर में सरपंच रामकुमार बिंदिया और सचिव जयगोपाल सैयाम पर विकास निधि में गड़बड़ी, निर्माण कार्यों में अनियमितता और धनराशि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे थे। मामला प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए चार सदस्यीय जांच दल गठित किया था।
जांच समिति में साकेत जैन (लेखाधिकारी, जिला पंचायत), प्रदीप कुमार शुक्ला (परियोजना अधिकारी मनरेगा), लोकेश कुमार नारनोरे (सीईओ जनपद समनापुर) और कशिश नायक (विकासखंड समन्वयक आवास) को शामिल किया गया था। इन अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में बिंदुवार जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
— लाखों रुपये के निर्माण कार्यों में गड़बड़ी का आरोप
5वें एवं 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत लाखों रुपये के विकास कार्यों में भारी अनियमितताएँ उजागर हुईं। सीसी सड़क निर्माण के नाम पर सप्लायर को भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन मजदूरों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। निर्माण स्थल पर कार्य अधूरे मिले और कई स्थानों पर निर्माण नहीं होने की पुष्टि स्वयं उप सरपंच ने भी की।
— ‘जनधारा’ की खबर के बाद प्रशासन सक्रिय
‘जनधारा न्यूज’ में प्रकाशित रिपोर्ट “अजगर ग्राम पंचायत में सरपंच-सेक्रेटरी की लूट—अंत्येष्टि सहायता से लेकर सड़क निधि तक हुआ बंदरबांट” के बाद पूरा मामला सुर्खियों में आया था। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला पंचायत ने जांच समिति गठित कर कार्रवाई शुरू की थी।
फिलहाल जांच प्रतिवेदन लंबित होने और समयसीमा की अनदेखी से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जिले में सरकारी राशि के दुरुपयोग पर सख्ती का अभाव है। इस मामले में जिला प्रशासन के अगले कदमों पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
— ये रहा पूरा मामला
