डिंडौरी। कहते हैं अगर प्रशासन में संवेदनशीलता हो, तो वर्षों से बुझती उम्मीदें भी फिर से रोशन हो जाती हैं। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला डिंडौरी कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में सामने आया, जहाँ गंभीर बीमारी से वर्षों तक संघर्ष करते रहे सहायक शिक्षक संतराम पट्टा को आखिरकार न्याय मिला।
विगत कई वर्षों से बीमारी के कारण अपने कर्तव्यों से अनुपस्थित रहे सहायक शिक्षक संतराम पटटा ने स्वस्थ होने के बाद कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में उपस्थित होकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से वे गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, जिस कारण वे विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सके। इस दौरान न केवल उनका वेतन रुका रहा, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद दयनीय हो गई।
मामले को सुनते ही कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने इसे सिर्फ एक फाइल नहीं, बल्कि एक इंसान की जिंदगी मानते हुए गंभीरता और मानवीय दृष्टिकोण से लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर नियमानुसार सहानुभूतिपूर्वक कार्रवाई करने और शिक्षक को पुनः कार्यग्रहण कराने के निर्देश दिए। जांच पूर्ण होने के उपरांत आज कलेक्टर के निर्देश पर संतराम पटटा को विकासखंड समनापुर अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला मानिकपुर में विधिवत कार्यग्रहण कराया गया।
9 वर्षों से लंबित समस्या का समाधान होते ही शिक्षक और उनके परिवार के चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक उठी। इस मानवीय निर्णय से विशेष रूप से बैगा समुदाय में भी खुशी की लहर दौड़ गई। समुदाय के लोगों ने कलेक्टर की इस संवेदनशील पहल के लिए आभार व्यक्त किया और इसे न्याय व संवेदना की मिसाल बताया।
कार्यग्रहण पत्र प्रदान करते समय कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने पटटा को भविष्य में अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करने, विद्यार्थियों को नियमित शिक्षण देने और शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।नकलेक्टर की इस सराहनीय और मानवीय पहल से न केवल शिक्षक समुदाय में हर्ष व्याप्त है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि प्रशासन जब संवेदनशील होता है, तो टूटते जीवन फिर से संवर सकते हैं।
