— क्या आंख बंद कर फर्जी बिलों का हो रहा भुगतान, जिम्मेदार बने तमाशबीन..?
— बजाग जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत परसवाह का मामला
मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जहां गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रही हैं, वहीं डिंडौरी जिले की जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत परसवाह में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। यहां फर्जी बिलों और मनमाने भुगतानों के जरिए लाखों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
— ये रहा पूरा मामला
दरअसल ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2022 से 2025 के बीच पंचायत में आंगनबाड़ी भवन, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों को केवल कागजों में पूरा दिखा दिया गया। जमीन पर इनका कोई अस्तित्व नहीं है। आरोप है कि सरपंच और तत्कालीन सचिव रजनी परस्ते ने अपने चहेते सप्लायर त्रिलोकचंद साहू को फर्जी बिलों के माध्यम से लाखों रुपये का भुगतान किया। ग्राम पंचायत द्वारा किए गए भुगतानों में कई बोगस बिल ऐसे हैं जिनमें न पंचायत का नाम, न तारीख, न दर का उल्लेख किया गया है। उदाहरणस्वरूप, ज्योति ऑनलाइन मोबाइल फोटोकॉपी के बिल नंबर 460 में लैपटॉप फॉर्मेट के नाम पर ₹5,000, सात रजिस्टर के लिए ₹14,000, और दस पेन के लिए ₹3,000 का भुगतान दिखाया गया है। वहीं, मेसर्स साहू मटेरियल सप्लायर — जो खुद रेत, गिट्टी और ईंट सप्लाई करता है — को रजिस्टर और स्टेशनरी सामग्री के नाम पर ₹26,000 का भुगतान कर दिया गया। इन अमान्य बिलों से स्पष्ट है कि जिम्मेदारों ने नियमों और वित्तीय प्रक्रिया की खुली अनदेखी कर सरकारी खजाने को चुना लगाया। पंचायत में विकास कार्यों से अधिक धन कार्यालयीन सामग्री पर खर्च दिखाया गया, ताकि फर्जी भुगतान के जरिए निजी लाभ कमाया जा सके।

ग्राम पंचायत परसवाह में 15वें और 5वें वित्त आयोग की राशि का भी जमकर दुरुपयोग हुआ है। “अन्य कार्यालयीन व्यय” के नाम पर लगभग ₹4 लाख रुपये खर्च दिखाए गए। वहीं, 15वें वित्त से स्वीकृत पाइपलाइन कार्य के स्थान पर सीसी रोड का भुगतान कर दिया गया — वह भी बिना जियो टैग और मूल्यांकन रिपोर्ट के। टाइड फंड की ₹54,500 राशि को अनटाइड मद में स्थानांतरित कर ₹4,45,825 रुपये का मनमाना भुगतान किया गया।

बता दें कि पंचायत पोर्टल पर दर्ज अभिलेखों से गड़बड़ी साफ झलकती है, लेकिन विभागीय अधिकारी मौन दर्शक बने हुए हैं। जब सचिव से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा — “मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।” स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्रीय पंचायत समन्वयक की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है, जिससे भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिल रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत परसवाह के सभी कार्यों और भुगतानों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि इस मामले की गहन जांच की जाए, तो लाखों रुपये के फर्जी भुगतानों का बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है।
इनका कहना है”
यदि भुगतान में वित्तीय अनियमितता बरती गई तो जांच कराई जाएगी, तथ्यों के आधार पर कार्रवाई तय होगी।
— रामबाबू देवांगन, प्रभारी सीईओ, जनपद पंचायत बजाग




