Dindori Breaking News : किसानों की लड़ाई लड़ते-लड़ते थके पदाधिकारी, भारतीय किसान संघ डिंडौरी की पूरी टीम ने छोड़े पद….

Rathore Ramshay Mardan
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किसानों के लिए लड़ रहे पदाधिकारियों ने ही छोड़ दिया पद, डिंडौरी में बड़ा फैसला

 

डिंडौरी। किसानों की समस्याओं को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे भारतीय किसान संघ की जिला इकाई ने आखिरकार बड़ा और भावनात्मक फैसला लेते हुए सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि किसानों की आवाज बार-बार उठाने के बावजूद शासन-प्रशासन से कोई ठोस समाधान नहीं मिला, जिससे आहत होकर यह निर्णय लेना पड़ा।

 

 

जानकारी के अनुसार भारतीय किसान संघ जिला डिंडौरी के पदाधिकारी लंबे समय से जिले के किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर सक्रिय रहे। संगठन के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याएं सुनते रहे और संगठन को मजबूत बनाने के लिए कई ग्राम समितियों का गठन भी किया गया। किसानों की उम्मीद थी कि उनकी आवाज शासन तक पहुंचेगी और समस्याओं का समाधान होगा।

 

 

किसानों की मांगों को लेकर 29 दिसंबर 2025 से शहपुरा के रानी दुर्गावती स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन भी शुरू किया गया था। आंदोलन के दौरान किसानों की 29 प्रमुख मांगों को लेकर जबलपुर संभाग के आयुक्त को ज्ञापन सौंपा जाना था। लेकिन लंबे समय बीतने के बाद भी किसानों की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

 

 

जिला पदाधिकारियों का कहना है कि किसान हितों की लड़ाई में संगठन के कार्यकर्ताओं ने अपनी क्षमता से बढ़कर मेहनत की। कई बार व्यक्तिगत स्तर पर समय और धन भी खर्च किया गया, लेकिन इसके बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। इसी निराशा और पीड़ा के चलते जिला कार्यकारिणी ने सामूहिक रूप से अपने दायित्वों से मुक्त होने का निर्णय लिया।

 

 

इस संबंध में जिला अध्यक्ष बिहारी लाल साहू और जिला मंत्री एडवोकेट निर्मल कुमार साहू के हस्ताक्षरयुक्त पत्र संगठन के प्रांत पदाधिकारियों को भेजा गया है। पत्र में लिखा गया है कि किसानों की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन अपेक्षित सहयोग और सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने से मन व्यथित है और इसी कारण पद छोड़ने का निर्णय लिया गया है।

जिला कार्यकारिणी के इस सामूहिक इस्तीफे से किसान संगठनों के साथ-साथ क्षेत्र की राजनीति में भी हलचल मच गई है। अब सबकी नजर संगठन के प्रांतीय नेतृत्व पर टिकी है कि वे इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और जिले में संगठन की गतिविधियों को आगे कैसे संचालित किया जाएगा।

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