Corruption News : निगरानी तंत्र फेल..? विकास की आड़ में लाखों की वित्तीय अनियमितता, ₹9.95 लाख की योजना में ₹11.71 लाख का भुगतान, बिना टीएस और अमान्य बिलों से निकासी…

Rathore Ramshay Mardan
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डिंडौरी। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास की बुनियादी इकाई माना जाता है, लेकिन जब इन्हीं पंचायतों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगें, तो यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए चिंता का विषय बन जाता है। जनपद पंचायत डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत सारंगपुर पड़रिया में सामने आया मामला इसी ओर इशारा करता है, जहां विधायक निधि 5वें वित्त और 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सारंगपुर पड़रिया में सरपंच टेक सिंह और सचिव राजेश मसराम द्वारा विकास कार्यों के नाम पर नियमों को दरकिनार कर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। गौरतलब यह है कि विधायक निधि से स्वीकृत 9 लाख 95 हजार रुपये की राशि में से बड़ी रकम बिना जीएसटी, अमान्य एवं धुंधले बिलों, और बिना विवरण (मात्रा, दर, मूल्य) के अपने चहेते फर्मों को भुगतान कर दी गई। यह न केवल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि जनधन के साथ सीधा खिलवाड़ भी माना जा रहा है।

मामले की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि स्वीकृत राशि में से 7 लाख 42 हजार 460 रुपये को आकस्मिक व्यय दर्शाया गया, जबकि शेष कार्य सामग्री और मजदूरी सहित स्वीकृत था। वहीं दूसरी ओर, अन्य निधि से पुलिया निर्माण सामग्री क्रय के नाम पर 4 लाख 30 हजार 250 रुपये का भुगतान बिना टीएस (टेक्निकल स्वीकृति) के कर दिया गया। कुल मिलाकर जिम्मेदारों की कथित सांठगांठ से 11 लाख 71 हजार 710 रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया, जो स्वीकृत राशि और कार्य प्रकृति दोनों पर सवाल खड़े करता है।

मजे की बात यह है कि पंचायत में अनियमितताओं का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 15वें वित्त आयोग की टाइड और अनटाइड फंड की राशि का भी इसी तरह दुरुपयोग किया गया। सीसी सड़क के नाम से स्वीकृत राशि को कथित तौर पर पुलिया निर्माण एवं अन्य मदों में खर्च दिखाया गया। इसके अलावा टाइड फंड से स्वीकृत स्वच्छता परिसर, पेयजल कूप निर्माण सहित अन्य कार्यों की राशि को अलग-अलग मदों में व्यय दर्शाकर, स्टेशनरी के नाम पर अमान्य फोटो लगाकर लाखों रुपये निकाल लिए गए।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित सरपंच और सचिव के विरुद्ध पूर्व में प्रकरण क्रमांक 89 के तहत मामला दर्ज है। इसके बावजूद न तो प्रभावी जांच पूरी हुई और न ही ठोस कार्रवाई दिखाई दी। आरोप है कि इसी लापरवाही का फायदा उठाकर पंचायत में एक बार फिर मनमाने ढंग से भुगतान किए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि जिम्मेदारों के हौसले किस कदर बुलंद हैं।

स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि इस पूरे मामले ने पंचायत स्तर पर निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि समय रहते निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण विकास के नाम पर होने वाली ऐसी वित्तीय अनियमितताएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। वहीं अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जनधन की सुरक्षा एवं पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

इनका कहना है “

ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर किए गए सभी भुगतान की जांच कराई जाएगी।

 दिव्यांशु चौधरी, जिला पंचायत सीईओ डिंडौरी।

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