Bravery & Patriotism : वीरता के प्रतीक दुर्गादास राठौर की 387वीं जयंती, डिंडौरी में भव्य आयोजन…

Rathore Ramshay Mardan
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मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में वीर दुर्गादास राठौर की 387वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई मातृभूमि की रक्षा और वीरता के प्रतीक शिरोमणि वीर दुर्गादास राठौर की 387वीं जयंती जिले के विभिन्न स्थानों पर बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। जिला मुख्यालय सहित समनापुर, अमरपुर और ग्राम चांदरानी में हुए आयोजनों में सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर वीर शिरोमणि को नमन किया।

समनापुर तिराहा स्थित प्रतिमा स्थल पर समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने माल्यार्पण, तिलक और पूजा-अर्चना कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस, राजपूत राठौर समाज अध्यक्ष कृष्ण सिंह परमार, पार्षद राजेश पाराशर, रितेश जैन, हरिहर पाराशर, शत्रुघ्न पाराशर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

जनपद मुख्यालय समनापुर में राठौर समाज के युवाओं ने मां सरस्वती की तैलीय चित्र पर पूजन के बाद वीर दुर्गादास राठौर की प्रतिमा का माल्यार्पण और तिलक किया। कार्यक्रम में उनके अदम्य साहस, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक गाथाएं सुनाई गईं। इस दौरान हेमसिंह राजपूत, शिवराम राजपूत, भारत राजपूत, रामकुमार राजपूत, श्रवण कुमार गौतम, भीखम राजपूत, जयसिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।

अमरपुर ब्लॉक मुख्यालय में भी राठौर समाज ने उत्साहपूर्वक जयंती मनाई। यहां वीर दुर्गादास राठौर के चित्र पर तिलक, फल और फूल अर्पित कर जयकारों के साथ श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर रामकिशोर राजपूत, आकाश नामदेव और अमरलाल धुर्वे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

ग्राम चांदरानी में भी जयंती का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर बीरन सिंह, मोहित सिंह, रामकुमार सिंह, नारायण सिंह, रूपराम सिंह, कामता सिंह, रामनाथ, रतन सिंह, माधवसिंह सिंह, ओम प्रकाश, कीरत सिंह, रामू सिंह, योगेश्वर, नरोत्तम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने वीर दुर्गादास राठौर के जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।

गौरतलब है कि वीर दुर्गादास राठौर का जन्म 13 अगस्त 1638 को मारवाड़ के साल्वा गांव में हुआ था। उनके पिता आसकरण राठौर महाराजा जसवंत सिंह के मंत्री थे, जबकि माता नेतकंवर बाई ने उनमें स्वाभिमान, पराक्रम और देशभक्ति के संस्कार डाले।

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