भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने प्रदेशभर में व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 119 राजस्व निरीक्षकों को प्रभारी नायब तहसीलदार का प्रभार सौंपने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश वल्लभ भवन मंत्रालय, भोपाल से जारी किया गया, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा और आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा।
यह कार्रवाई मध्यप्रदेश जूनियर प्रशासनिक (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम-2011 तथा मध्यप्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी सेवा भर्ती नियम-2012 के तहत गठित विभागीय छानबीन समिति की अनुशंसा एवं मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुरूप की गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण नीति 2025 की अवधि समाप्त होने के बाद भी केवल एक बार, राजस्व न्यायालयीन कार्यों की आवश्यकता को देखते हुए यह स्थानांतरण किए गए हैं।
जारी सूची के अनुसार इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, डिण्डौरी, शहडोल, छतरपुर, सागर, उज्जैन, बालाघाट, सीधी, पन्ना, सिवनी, मण्डला सहित लगभग सभी संभागों और जिलों के राजस्व निरीक्षकों को अलग-अलग जिलों में प्रभारी नायब तहसीलदार के रूप में पदस्थ किया गया है। कई जिलों में एक साथ अनेक अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की उम्मीद जताई जा रही है।


राजस्व विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि कार्यवाहक नायब तहसीलदार के रूप में कार्य करने वाले राजस्व निरीक्षक किसी भी प्रकार की वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतनमान या अतिरिक्त भत्तों का दावा नहीं कर सकेंगे। यह प्रभार केवल अस्थायी व्यवस्था के रूप में दिया गया है और नियमित नायब तहसीलदार की नियुक्ति होते ही यह स्वतः समाप्त माना जाएगा।
इसके साथ ही शासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि यदि किसी राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या कोई दंडादेश लंबित है, तो ऐसे अधिकारी को प्रभारी प्रभार पर कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। संबंधित मामलों में आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन, ग्वालियर के माध्यम से विस्तृत प्रतिवेदन विभाग को भेजना अनिवार्य होगा।


आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रभारी नायब तहसीलदार केवल जिला या संभागीय कार्यालयों में ही पदस्थ रहेंगे और उन्हें अन्य विभागों में प्रतिनियुक्त नहीं किया जाएगा। प्रभार की अवधि में स्थानांतरण के लिए वही नीति लागू होगी, जो राज्य शासन द्वारा समय-समय पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए निर्धारित की जाती है।


राजस्व विभाग ने यह अधिकार भी सुरक्षित रखा है कि किसी भी समय बिना पूर्व सूचना दिए यह प्रभार निरस्त कर अधिकारी को उसके मूल पद राजस्व निरीक्षक पर वापस भेजा जा सकता है। साथ ही, कार्यवाहक नायब तहसीलदार के रूप में कार्य करने से भविष्य की पदोन्नति में कोई विशेष वरीयता नहीं मिलेगी। प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को राजस्व मामलों में तेजी, न्यायालयीन लंबित प्रकरणों के दबाव को कम करने और फील्ड स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सोर्स:—राजस्व विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश।
