डिंडौरी। जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में इन दिनों 5वें एवं 15वें वित्त आयोग की राशि के खुलेआम दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है, जहां शासन द्वारा तय नियमों और दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर सरपंच और सचिव द्वारा मनमाने तरीके से भुगतान किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल पर निगरानी तंत्र में बैठे जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं, या फिर जानबूझकर पूरे मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या यह पूरा भ्रष्टाचार उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर जनपद से लेकर जिला स्तर तक का तंत्र इन कथित भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है।
दरअसल, ताजा मामला अमरपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कोको का है, जहां पंचायत सरपंच छोटी बाई सैयाम एवं सचिव शिव प्रसाद यादव पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन की खुलेआम अनदेखी कर, निर्माण कार्यों की पूरी राशि अपने चहेते सप्लायरों के खातों में डालने के गंभीर आरोप लगे हैं।
गौरतलब है कि 5वें वित्त की राशि में सरपंच-सचिव द्वारा जमकर बंदरबाट किया गया। वर्ष 2025-26 में पुताई सामग्री क्रय के नाम पर के. जी. एन. हार्डवेयर के बिल क्रमांक 461 को एक ही सामग्री के लिए दो बार भुगतान किया गया। एक ही बिल पर 6620 रुपये और 6600 रुपये का भुगतान दर्शाया गया, जबकि सामग्री की खरीदी केवल एक बार की गई थी। इसके अलावा आकस्मिक बिलों के नाम पर पुताई कार्य हेतु 8720, 5400, 8870, 8500 और 5840 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह केवल पुताई के नाम पर 50 हजार 550 रुपये निकाल लिए गए।

स्टेशनरी सामग्री के नाम पर वर्ष 2025-26 में 6574 रुपये का भुगतान दर्शाया गया। एक ओर ग्राम पंचायत द्वारा कंप्यूटर दुकानों से कंप्यूटर सामग्री से संबंधित उपकरणों की खरीदी की जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर फोटोकॉपी और स्टेशनरी के नाम पर हजारों रुपये के बिल लगाए जा रहे हैं। इसी तरह वर्ष 2025-26 में चाय-नाश्ता के नाम पर 5200, 8770 और 8870 रुपये, कुल 22 हजार 840 रुपये का भुगतान किया गया, जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि मात्र दो महीनों में ही 22 हजार रुपये सिर्फ चाय-नाश्ते पर खर्च कर दिए गए। यह सब अब आम बात हो चुकी है, क्योंकि विकास की राशि जिम्मेदारों की फिजूलखर्ची में निपटाई जा रही है, और निगरानी करने वाले आंख मूंदे बैठे हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला बिल की तारीख से पहले भुगतान का है। धुर्वे कंप्यूटर एवं स्टेशनरी से दिनांक 04 जनवरी 2025 को 6000 रुपये का भुगतान जी राम जी और तिरंगा झंडा, फोटो के नाम पर किया गया, जबकि संबंधित जी राम जी का बिल 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में “विकसित भारत” कार्यक्रम के नाम से पेश किया गया। सवाल यह है कि जब बिल ही 10 महीने बाद का है, तो उससे पहले योजना के नाम पर भुगतान कैसे कर दिया गया। इसी तरह 26 जनवरी 2026 के अवसर पर 04 फरवरी 2026 को तिरंगा झंडा और फोटो के नाम पर 3850 रुपये निकाले गए। गौर करने वाली बात यह है कि मात्र 10 महीनों के भीतर दो बार तिरंगा झंडा और फोटो के नाम पर हजारों रुपये का भुगतान दिखाया गया।

भ्रष्टाचार यहीं नहीं रुका। 15वें वित्त आयोग की राशि में भी भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 15वें वित्त टाइड और अनटाइड की राशि से 3 लाख 39 हजार 190 रुपये, 14 हजार 500 रुपये, 12 हजार 440 रुपये, 15 हजार रुपये, 2920 रुपये, 12 हजार रुपये और 14 हजार 376 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि इन भुगतानों में न तो वर्क आईडी दिखाई दे रही है, और न ही जियो-टैग फोटो उपलब्ध हैं। नेट रिचार्ज, सीसी सड़क और अन्य मदों में नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस तरह के भुगतान सरपंच और सचिव द्वारा हर वित्तीय वर्ष में किए जाते रहे हैं, जिससे ग्राम विकास की राशि का खुलेआम बंदरबाट किया गया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और पंचायत विभाग इन गंभीर आरोपों पर कब संज्ञान लेता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

