मध्यप्रदेश के सतना/मैहर जिले से एक ऐसी शराबी शिक्षक का मामला आया है, जिसने पूरी सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। जहां शिक्षा को समाज की सबसे पवित्र जिम्मेदारी माना जाता है, जहाँ शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण का आधार होता है। ऐसे में जब एक शिक्षक का शराब के नशे में विद्यालय परिसर में बेहोश मिलना सामने आता है, तो यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की छवि को झकझोर देने वाली बन जाती है।
— ये रहा पूरा मामला
दरअसल यह पूरा मामला शासकीय प्राथमिक माध्यमिक विद्यालय करौंदीकॉप, संकुल केंद्र शा. उमावि. नांदन का है। यहां पदस्थ प्राथमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक धनेंद्र कुमार पाण्डेय दिनांक 03 फरवरी 2026 को विद्यालय परिसर में शराब के नशे की हालत में बेहोश पाए गए। उक्त घटना की जानकारी सोशल मीडिया ग्रुपों के माध्यम से सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।

— जारी आदेश के मुताबिक
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी सतना/मैहर द्वारा संकुल प्राचार्य एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीआरसीसी) को तत्काल जांच के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान तैयार किए गए स्थल पंचनामा एवं प्रतिवेदन में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया कि संबंधित शिक्षक विद्यालय परिसर में नशे की अवस्था में पड़े मिले। उनके बैग से शराब की बोतल बरामद की गई तथा उनकी स्थिति चलने-फिरने योग्य नहीं थी। प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख है कि उनके मुंह से शराब की तीव्र गंध आ रही थी।
जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित शिक्षक के कृत्य को शिक्षकीय मर्यादा एवं शासकीय सेवा आचरण नियमों के प्रतिकूल माना। आदेश में कहा गया है कि पाण्डेय का आचरण म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन है। इसके फलस्वरूप म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के अंतर्गत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन आदेश के अनुसार श्री पाण्डेय का मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामनगर नियत किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। साथ ही संकुल प्राचार्य को यह निर्देशित किया गया है कि विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो और विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित होती रहे।
इस घटना ने अभिभावकों और समाज के बीच चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक बच्चों के लिए आदर्श होते हैं और इस तरह की घटनाएं बच्चों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। विभागीय स्तर पर भी यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और मर्यादा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सोर्स:— जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सतना/मैहर (म.प्र.)
