— मध्यप्रदेश शासन ने जारी की पदोन्नति सूची, पे-मैट्रिक्स लेवल-9 में मिली पदोन्नति; दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि रहेगी
भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य शासन के वन विभाग ने 216 उप वनक्षेत्रपालों को पदोन्नत कर वनक्षेत्रपाल के पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश वन विभाग मंत्रालय, भोपाल द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी किया गया है।
— जारी आदेश के मुताबिक
जारी आदेश के अनुसार पदोन्नत किए गए अधिकारियों को पे-मैट्रिक्स लेवल-9, वेतनमान 36,200-1,14,800 रुपये में वनक्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति के साथ अधिकारियों की नई पदस्थापना भी निर्धारित की गई है।
216 अधिकारियों के नाम सूची में शामिल
वन विभाग द्वारा जारी विस्तृत सूची में कुल 216 अधिकारियों के नाम शामिल हैं। सूची में प्रदेश के विभिन्न वनमंडलों, टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और वन विभाग के अलग-अलग क्षेत्रों में पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
सूची में माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी, रीवा, उमरिया, नर्मदापुरम, रायसेन, अलीराजपुर, शहडोल, देवास, पूर्व मंडला, डिंडौरी सहित प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से जुड़े अधिकारियों की पदस्थापना शामिल है।
आदेश में कई अधिकारियों को परिक्षेत्र अधिकारी, जबकि कुछ को वनक्षेत्रपाल विशेष कर्तव्य, उत्पादन वनमंडल, टाइगर रिजर्व एवं अन्य महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में पदस्थ किया गया है।
पदोन्नति के बाद दो वर्ष की परिवीक्षा
शासन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उक्त पदोन्नति मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के अंतर्गत दो वर्ष की परीक्षण/परिवीक्षा अवधि के लिए होगी। इसके अलावा आदेश में उल्लेख है कि पदोन्नतियां माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित विशेष अनुमति याचिका क्रमांक 13954/2016 और सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा भविष्य में पारित किए जाने वाले आदेशों के अधीन रहेंगी।
वेतन निर्धारण के लिए एक माह में देना होगा विकल्प
पदोन्नत शासकीय सेवकों को मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के नियम 13 के अनुसार वेतन निर्धारण के लिए आदेश प्राप्त होने की तारीख से एक माह के भीतर अपना विकल्प प्रस्तुत करना होगा। वन विभाग के इस आदेश से प्रदेशभर में पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ वन प्रबंधन, संरक्षण और क्षेत्रीय प्रशासन में भी बदलाव देखने को मिलेगा।

