— दोषमुक्त अधिकारी के खिलाफ एफआईआर कराने का आरोप, सहकारी निरीक्षक तत्काल प्रभाव से निलंबित
डिंडौरी। जिला प्रशासन ने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शहपुरा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहकारी समिति बरगांव से जुड़े एक प्रकरण की जांच के दौरान गठित दल ने पाया कि संबंधित भूमि पर सिकमी बटाई का नाम दर्ज नहीं था तथा समर्थन मूल्य पर फसल विक्रय संबंधी दावे भी तथ्यहीन थे। जांच दल में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खाद्य अधिकारी एवं राजस्व निरीक्षक शामिल थे। जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन नायब तहसीलदार शैलेष गौर को दोषमुक्त बताया गया था।
इसके बावजूद वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे ने उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट के विपरीत पुलिस थाना में बयान दर्ज कराए, जिसके आधार पर शैलेष गौर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई। प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई बिना सक्षम अधिकारियों की अनुमति के की गई। आदेश में उल्लेख किया गया है कि बयान दर्ज कराने से पूर्व न तो जिला कलेक्टर और न ही विभागीय प्रमुख से अनुमति ली गई थी।
जिला प्रशासन ने इस कृत्य को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के तहत कदाचार की श्रेणी में रखा है। इसके आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत रामकृष्ण उद्दे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला पंचायत डिंडौरी निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




