भोपाल। अपराध अनुसंधान विभाग, पुलिस मुख्यालय भोपाल ने गिरफ्तारी प्रक्रिया को पारदर्शी और विधिसम्मत बनाने के लिए प्रदेशभर की पुलिस इकाइयों को महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। यह परिपत्र माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के 6 नवंबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है।
जारी निर्देशों के अनुसार अब किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के समय पुलिस को गिरफ्तारी के ठोस कारण लिखित रूप में देना अनिवार्य होगा। केवल मौखिक जानकारी पर्याप्त नहीं मानी जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गिरफ्तारी के कारण ऐसी भाषा में लिखे जाएं, जिसे गिरफ्तार व्यक्ति आसानी से समझ सके।
उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इसी अधिकार के संरक्षण के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
परिपत्र में यह भी उल्लेख है कि गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी या तो गिरफ्तारी के समय दी जाएगी या फिर अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से कम से कम दो घंटे पूर्व उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही इस प्रक्रिया का विधिवत उल्लेख गिरफ्तारी पंचनामा या संबंधित अभिलेखों में दर्ज करना भी जरूरी होगा। इस संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 का हवाला दिया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी, जबकि आरोपी को तत्काल रिहाई का अधिकार मिल सकता है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि वे इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं, ताकि कानून के साथ-साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की भी पूर्ण सुरक्षा हो सके।
