मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर में हुए निर्माण कार्यों और मजदूरी भुगतान में भारी अनियमितताओं को लेकर न्यायालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी/विहित प्राधिकारी (पंचायत), जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा बड़ा फैसला सुनाया गया है। उच्च न्यायालय के निर्देश के तहत हुई जांच के आधार पर 5.57 लाख रुपये की वसूली का आदेश दिया गया है। दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों में सरपंच, सचिव, उपयंत्री और ग्राम रोजगार सहायक शामिल हैं।
जांच का खुलासा:
प्रकरण की पृष्ठभूमि में उच्च न्यायालय, जबलपुर के आदेश एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, भोपाल के निर्देश अनुसार ग्राम पंचायत कंचनपुर में देयता निर्धारण हेतु प्रकरण दर्ज किया गया था। जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
फर्जी जॉब कार्ड और भुगतान: तत्कालीन रोजगार सहायक श मुकेश बाधव द्वारा एक ही वित्तीय वर्ष में दो जॉब कार्ड जारी कर, फर्जी तरीके से 190 से अधिक मजदूरी का भुगतान किया गया।
निर्माण कार्य में तकनीकी लापरवाही: उपयंत्री श्याम सुंदर सेन द्वारा स्थल चयन एवं मूल्यांकन में गंभीर त्रुटियां पाई गईं, जबकि उन्होंने कार्यकाल के दौरान अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया।
भवन निर्माण में गुणवत्ता की शिकायतें: हालांकि अंतिम निरीक्षण में भवन की वर्तमान स्थिति संतोषजनक पाई गई, लेकिन बाउंड्रीवॉल के नीचे क्रैक एवं सीपेज जैसे निर्माण दोष जांच में दर्ज हुए।
GSTIN नंबर वाली फर्म ब्लैकलिस्ट: जिस फर्म (के.के. ट्रेडर्स) को सामग्री आपूर्ति का भुगतान किया गया, वह दिसंबर 2019 में ही निरस्त हो चुकी थी। बता दें कि न्यायालय ने दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश: न्यायालय ने आदेश में विस्तृत जांच के बाद दोषियों पर राशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
दोषी अधिकारी पद वसूली राशि
कृष्ण कुमार ओटिये सरपंच ₹2,23,500
लक्ष्मी प्रसाद यादव सचिव ₹2,23,500
श्याम सुन्दर सेन उपयंत्री ₹38,934
मुकेश बाधव ग्राम रोजगार सहायक ₹71,786
कुल राशि। — ₹5,57,720
यह राशि बकाया भू-राजस्व की भांति वसूली के निर्देशों के साथ तय की गई है। यदि यह राशि एक माह के भीतर जमा नहीं की जाती है, तो म.प्र. पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 एवं म.प्र. भू-राजस्व संहिता के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं दोषी सचिव और रोजगार सहायक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरपंच व पंचों के खिलाफ म.प्र. पंचायतराज अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। दोषी फर्म को ब्लैकलिस्टेड कर आगामी भुगतान प्रतिबंधित किया जाएगा। आंगनवाड़ी भवन की सुरक्षा हेतु पिचिंग कार्य व जाली लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
