— मंत्रि-परिषद की मंजूरी के लिए भेजा गया नाम बदलने का प्रस्ताव, 26वीं बैठक में कई अहम फैसले
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश जल निगम के संचालक मंडल की 26वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित (एमपीजेएनएम) के पुनर्गठन और उसका नाम बदलकर मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन (एमपी-वास्को) किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। संचालक मंडल ने प्रस्ताव को अंतिम अनुमोदन के लिए मंत्रि-परिषद को भेजने की स्वीकृति प्रदान की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए नाम और नई जिम्मेदारियों के साथ एमपी-वास्को प्रदेश में जल विकास और स्वच्छता प्रबंधन से जुड़े कार्यों को नए लक्ष्यों तथा अतिरिक्त संसाधनों के साथ आगे बढ़ाएगा। बैठक में जल निगम की ओर से प्रस्तुत विभिन्न एजेंडा प्रस्तावों पर भी चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी गई।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए तैयार संचालक मंडल के प्रतिवेदन तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखाओं का अनुमोदन किया गया। इसके साथ ही कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावॉट की ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना विकसित करने के लिए गठित परियोजना कंपनी में मध्यप्रदेश जल निगम के प्रतिनिधित्व के लिए प्रबंध संचालक को अधिकृत किया गया। परियोजना कंपनी में डीमैटीरियलाइज्ड रूप में 26 प्रतिशत इक्विटी शेयर रखने को भी मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री ने जल निगम के इक्विटी शेयरों के नए पदाधिकारियों को हस्तांतरण तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार 57 करोड़ रुपए के बजट अनुमान को भी अनुमोदित किया। संचालक मंडल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की पुन: नियुक्ति को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन और एक्जीक्यूशन मेथोडोलॉजी के अनुसार मध्यप्रदेश जल निगम के प्रबंध संचालक की टेंडर मंजूरी की सीमा 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव पीएचई सचिन सिन्हा, प्रमुख सचिव पीएचई मनीष सिंह, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य संदीप यादव, मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित के एमडी वीएस चौधरी कोलसानी सहित संचालक मंडल के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
