मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिला में संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए जिलेभर की महिलाओं ने गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ हलषष्ठी व्रत रखा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाला यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम को समर्पित है, जिसे ललही षष्ठ या हरछठ के नाम से भी जाना जाता है।
डिंडौरी जिला मुख्यालय सहित सभी विकासखंडों में महिलाओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ व्रत किया। मान्यता है कि इस दिन हल से जुती फसल का उपयोग वर्जित होता है, इसलिए व्रत में बिना हल से उगी धान का चावल, महुआ के पत्ते, धान की लाई, भैंस के दूध-दही व घी का प्रयोग किया जाता है। महिलाएं महुआ की डाली से दातून करती हैं और तालाब में उगी वस्तुओं का सेवन करती हैं।
सुबह व्रती महिलाओं ने गौरी-गणेश और कुश की पूजा कर संतान की सलामती की प्रार्थना की। दोपहर में सामूहिक रूप से हरछठ महारानी की ग्वालिन वाली कथा का पाठ किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और इसे कार्तिक मास के छठ पर्व से भिन्न माना जाता है।


