Ram Navami Special : डिंडौरी मुख्यालय में रामनवमी पर भव्य झांकियां, जिलेभर में जवारे विसर्जन !उमड़ा आस्था का सैलाब….

Rathore Ramshay Mardan
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डिंडौरी। चैत्र नवरात्र के समापन और रामनवमी के अवसर पर डिंडौरी जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में आस्था, श्रद्धा और उत्साह का भव्य नजारा देखने को मिला। नौ दिनों तक चले नवरात्रि पर्व के बाद शुक्रवार को जिलेभर में माता के जवारे का विसर्जन धूमधाम से किया गया। वहीं रामनवमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की आकर्षक झांकियों के साथ विशाल और भव्य रैलियां निकाली गईं, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

 

 

जिला मुख्यालय डिंडौरी में रामनवमी के दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की आकर्षक झांकियां सजाई गई थीं। डीजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया। “जय श्री राम” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा और जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत कर प्रसाद वितरण किया।

 

 

इसी के साथ जिले के विभिन्न गांवों और कस्बों में भी नवरात्रि के समापन पर जवारे विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं और भक्ति गीतों के साथ शोभायात्रा में भाग लिया। गांव-गांव में गाजे-बाजे के साथ निकली यात्राओं ने सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का संदेश दिया।

 

 

इसी क्रम में शहपुरा विकासखंड के ग्राम मानिकपुर में भी नवरात्रि के उपरांत माता के जवारे का विसर्जन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। ग्राम के दुर्गा मंदिर और खेरमाता मंदिर में पूरे नौ दिनों तक विधि-विधान से कलश स्थापना की गई थी। नवमी के दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का विशेष श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की गई।

 

 

शुक्रवार को गांव में गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर शामिल हुईं। शोभायात्रा दुर्गा मंदिर और खेरमाता मंदिर का भ्रमण करते हुए स्थानीय नदी-तालाब तक पहुंची, जहां विधिवत पूजा के बाद जवारे का विसर्जन किया गया। इस दौरान “जय श्री राम”, “मां दुर्गा की जय” और “विश्व का कल्याण हो” जैसे जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। पूरे जिले में आयोजित इन धार्मिक आयोजनों ने न केवल आस्था और परंपरा को जीवंत किया, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता का भी संदेश दिया।

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