— अमरपुर में MHYSA हेरिटेज लिकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का शुभारंभ, 12 सदस्यीय टीम को मिली जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के अमरपुर विकासखंड में लंबे समय से बंद पड़ी MHYSA हेरिटेज लिकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का पुनः शुभारंभ किया गया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत मां नर्मदा स्वसहायता समूह को यूनिट के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। समूह की 12 सदस्यीय टीम यूनिट का संचालन करेगी। यूनिट के दोबारा शुरू होने के साथ जहां समूह की आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को गति मिलने की बात कही जा रही है, वहीं समूह के नाम को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मां नर्मदा को मध्यप्रदेश सहित देशभर में करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र माना जाता है। नर्मदा तटों की धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को देखते हुए शराब की बिक्री और सेवन को लेकर प्रतिबंध और नियंत्रण की मांग समय-समय पर उठती रही है। ऐसे में शराब निर्माण से जुड़ी इकाई के संचालन की जिम्मेदारी ‘मां नर्मदा स्वसहायता समूह’ को दिए जाने से नामकरण को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
— एक ओर आस्था, दूसरी ओर लिकर यूनिट
मामले में सवाल यह उठ रहा है कि जिस मां नर्मदा के नाम से श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं, उसी नाम वाले स्वसहायता समूह के माध्यम से लिकर यूनिट का संचालन किया जाना कितना उचित माना जाए। यहां सवाल समूह की 12 सदस्यीय टीम या उनकी आजीविका पर नहीं, बल्कि समूह के नाम और शराब निर्माण से जुड़ी गतिविधि के बीच बने संबंध को लेकर है।
क्या संबंधित विभाग ने यूनिट का संचालन समूह को सौंपने से पहले उसके नाम और गतिविधि के इस पहलू पर विचार किया? क्या नियमों में इस प्रकार के नाम के साथ शराब निर्माण से जुड़ी गतिविधि संचालित करने का प्रावधान है? और यदि प्रावधान है, तो क्या धार्मिक भावनाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए नामकरण पर पुनर्विचार किया जा सकता है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
— शासन-प्रशासन के प्रयास से दोबारा शुरू हुई इकाई
शुभारंभ कार्यक्रम में बताया गया कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत इस प्रकार की संस्थाएं अलीराजपुर और डिंडौरी में संचालित हैं। डिंडौरी की यूनिट विभिन्न कारणों से लंबे समय से बंद थी। शासन-प्रशासन के प्रयासों और स्वसहायता समूह की मेहनत से इसे दोबारा शुरू किया गया है।
कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति प्रदेशाध्यक्ष पंकज सिंह तेकाम ने खाद्य एवं पेय पदार्थों के निर्माण में गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की बात कही। उन्होंने समूह के सदस्यों से सावधानीपूर्वक और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया और समूह को आगे बढ़ाने के लिए शासन-प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने स्वसहायता समूह के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए यूनिट के सुचारु संचालन, निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति तथा समूह की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए आवश्यक सहयोग और समन्वय पर जोर दिया।
प्रशासन के सामने नामकरण को लेकर सवाल
यूनिट के दोबारा शुरू होने से स्वसहायता समूह की 12 सदस्यों को आर्थिक गतिविधि से जुड़ने का अवसर मिला है। सरकार की मंशा समूह की आजीविका को मजबूत करना है, लेकिन दूसरी ओर ‘मां नर्मदा’ नाम और लिकर यूनिट का साथ आना अपने आप में ऐसा विषय है, जिस पर प्रशासन से स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस नामकरण को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या स्थिति स्पष्ट करता है और क्या धार्मिक आस्था से जुड़े इस संवेदनशील पहलू पर कोई निर्णय या पुनर्विचार किया जाता है। शुभारंभ कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक आशीष खरे, जिला वनमंडल अधिकारी अशोक सोलंकी, जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी, एसडीएम रामबाबू देवांगन, अनुसूचित जनजाति प्रदेशाध्यक्ष पंकज सिंह तेकाम, भाजपा जिलाध्यक्ष चमरू सिंह नेताम, रेडक्रास समिति अध्यक्ष नरेंद्र राजपूत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
