— नगर परिषद डिंडौरी पर गंभीर आरोप, जांच और आवास का कब्जा दिलाने की मांग
डिंडौरी। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर नगर परिषद डिंडौरी एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। वार्ड क्रमांक 14 पुरानी डिंडौरी निवासी संतोष कुमार ठाकुर ने कलेक्टर डिंडौरी को लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके नाम से स्वीकृत आवास को नगर परिषद के एक कर्मचारी द्वारा हितग्राही सूची से हटाकर किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया। मामले में उन्होंने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा उन्हें उनका स्वीकृत आवास दिलाने की मांग की है।
आवेदक संतोष कुमार ठाकुर ने अपने आवेदन में बताया है कि वे पुरानी डिंडौरी के वार्ड क्रमांक 14 के स्थायी निवासी हैं और उनका निवास एक कच्चा मकान है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राही होने के आधार पर आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन के दौरान उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ शपथ पत्र भी जमा किया था, जिसमें स्वयं को योजना का पात्र हितग्राही बताया था।
आवेदन के अनुसार, नगर परिषद द्वारा मौके पर जांच भी कराई गई थी। जांच के दौरान उनके निवास स्थल का निरीक्षण किया गया और मकान के फोटो भी लिए गए। इसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें लाभ मिलेगा, लेकिन बाद में उन्हें जानकारी मिली कि हितग्राही सूची में उनके नाम के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया है।
संतोष कुमार ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने शासन की हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि आवेदक को पूर्व में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल चुका है तथा वार्ड क्रमांक 15 में उनके नाम पर पक्का मकान निर्मित है। इसी आधार पर उन्हें योजना के लाभ के लिए अपात्र बताया गया।
हालांकि आवेदक ने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा है कि उन्हें आज तक किसी भी प्रधानमंत्री आवास का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि उनके नाम पर कोई आवास स्वीकृत हुआ है तो नगर परिषद यह स्पष्ट करे कि वह मकान कहां स्थित है, उसका कब्जा किसके पास है और उससे संबंधित दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं।
अपने आवेदन में उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि यदि उनके नाम पर स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कराया गया है और उन्हें उसका कब्जा नहीं दिया गया, तो कहीं ऐसा तो नहीं कि उनके नाम का आवास किसी अन्य व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए उपयोग कर लिया गया हो। उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जांच कराने तथा संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है।
आवेदक ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि नगर परिषद डिंडौरी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन और वास्तविक स्थिति की पुनः जांच कराई जाए। यदि उनके नाम पर स्वीकृत आवास पाया जाता है तो उसका विधिवत कब्जा उन्हें दिलाया जाए तथा किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
इस शिकायत के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और हितग्राहियों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि मामले की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और शिकायतकर्ता को न्याय मिल पाता है या नहीं।




