मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में पानी के लिए तरसते कूड़ा गांव के लोगों ने शनिवार सुबह जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। महिलाओं ने सड़क पर खाली बर्तन रखकर विरोध जताया, तो पुरुषों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। जाम के चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, वहीं एम्बुलेंस को पुलिस ने प्राथमिकता देकर बाहर निकाला। बता दें कि पानी संकट से नाराज़ ग्रामीणों ने पीएचई विभाग के अधिकारियों की समझाइश ठुकरा दी। आखिरकार विधायक ओमकार मरकाम के मौके पर पहुंचने के बाद ही ग्रामीणों ने जाम हटाया। विधायक के साथ ग्रामीणों ने गांव की खराब नल-जल व्यवस्था दिखाई। विभाग के एसडीओ ने तीन दिन में समाधान का भरोसा दिलाया।
गांव की लगभग ढाई हजार की आबादी को रोजमर्रा के लिए दो किलोमीटर दूर गोमती नदी से पानी लाना पड़ता है। नल-जल योजना का पानी सप्ताह में सिर्फ एक दिन मिलता है, वह भी सीमित मात्रा में। हाईवे निर्माण के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, वहीं चार हैंडपंप भी उखाड़ दिए गए, जिससे स्थिति और विकट हो गई है। ग्रामीण सुधा दुबे ने बताया कि सड़क किनारे पाइपलाइन से बहता गंदा पानी ही ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है। ग्राम पंचायत पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पुराने पाइप खुले पड़े हैं, जिनसे एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
वहीं डिंडौरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने पीएचई विभाग पर झूठी जानकारी देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विभाग 7 हजार हैंडपंप चालू बताता है, जबकि गांवों में कई बंद पड़े हैं। मरकाम बोले नर्मदा किनारे बसे गांवों को भी अगर प्यास से जूझना पड़े, तो यह शासन की बड़ी विफलता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि तीन दिन में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतरेंगे।





