— जर्जर बस स्टैंड की भूमि और दुकानों के स्वामित्व पर उठे सवाल, पुराने अभिलेखों की जांच की मांग— पंकज तेकाम बोले—मुख्यमंत्री से करेंगे चर्चा
डिंडौरी। नगर के जर्जर बस स्टैंड और उसके आसपास स्थित दुकानों के स्वामित्व को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। बस स्टैंड नगर परिषद की सीमा में है और परिसर में साफ-सफाई, नाली, प्रकाश व्यवस्था सहित विभिन्न नागरिक सुविधाओं पर नगर परिषद द्वारा खर्च किया जाता है। वहीं बस स्टैंड परिसर एवं आसपास की दुकानों को मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की संपत्ति बताया जाता रहा है। ऐसे में अब भूमि के वास्तविक स्वामित्व और रख-रखाव की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी है।
इस संबंध में अधिवक्ता सम्यक जैन द्वारा कलेक्टर डिंडौरी, मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के महाप्रबंधक जबलपुर और मुख्य नगर पालिका अधिकारी डिंडौरी को पत्र भेजकर बस स्टैंड से संबंधित भूमि एवं दुकानों के स्वामित्व की जांच कराने की मांग की गई है।
मामले में मुख्य सवाल यह है कि यदि बस स्टैंड परिसर की नागरिक सुविधाओं पर नगर परिषद का सार्वजनिक धन खर्च हो रहा है, तो भूमि और दुकानों का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है? साथ ही दुकानों से प्राप्त किराए और परिसर के रख-रखाव की व्यवस्था किस आधार पर संचालित हो रही है, इसे भी स्पष्ट किए जाने की मांग की गई है।
— पुराने अभिलेखों की जांच की मांग
बस स्टैंड की भूमि से जुड़े पुराने खसरे, नामांतरण, आवंटन, हस्तांतरण और अन्य मूल अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की गई है। पत्र में नगर परिषद मनासा बनाम मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, (1997) 11 SCC 640 सहित संबंधित न्यायिक प्रकरणों का उल्लेख करते हुए बस स्टैंड के प्रबंधन और स्थानीय निकाय की भूमिका का मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा राज्य शासन के 26 मई 2007 के निर्णय का हवाला देते हुए डिंडौरी बस स्टैंड से संबंधित पुराने रिकॉर्ड और हस्तांतरण की स्थिति की भी जांच की मांग की गई है।
— मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने की बात
मामले को लेकर प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष डिंडौरी पंकज तेकाम ने कहा है कि वे डिंडौरी बस स्टैंड की स्थिति और उससे जुड़ी संपत्ति के स्वामित्व का विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे। उन्होंने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए चर्चा करने की बात कही है।
— पुनर्विकास से पहले स्वामित्व स्पष्ट करने की मांग
बस स्टैंड की जर्जर स्थिति को देखते हुए लंबे समय से इसके पुनर्विकास की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मांग की गई है कि जांच के बाद यह स्पष्ट किया जाए कि भूमि नगर परिषद की है, राज्य सड़क परिवहन निगम की है या किसी अन्य व्यवस्था के तहत उपयोग के लिए उपलब्ध कराई गई थी। स्वामित्व और प्रबंधन की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही बस स्टैंड के रख-रखाव, दुकानों, राजस्व और पुनर्विकास को लेकर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकेगा।
