Police Social Media Rules : पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती, MP पुलिस मुख्यालय ने जारी किए 16 दिशा-निर्देश….

Rathore Ramshay Mardan
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— ड्यूटी के दौरान रील, फोटो-वीडियो अपलोड करने पर रोक, सरकारी दस्तावेज और संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने पर भी प्रतिबंध

 मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर “म.प्र. पुलिस सोशल मीडिया गाइडलाइन-2026” जारी की है। परिपत्र में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनुचित, अमर्यादित या आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने से लेकर सरकारी दस्तावेज, संवेदनशील जानकारी और पुलिस कार्रवाई से जुड़े फोटो-वीडियो साझा करने तक पर रोक लगाई गई है। दिशा-निर्देशों में कुल 16 बिंदुओं के माध्यम से पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल में सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

— जारी आदेश के अनुसार

जारी परिपत्र के अनुसार फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी अथवा अन्य अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप अपलोड नहीं किए जाएंगे। इस तरह की अनुचित सामग्री मिलने पर उसे तत्काल हटाने और भविष्य में दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

सरकारी दस्तावेज और संवेदनशील जानकारी साझा करने पर रोक

 

पुलिसकर्मियों को सरकारी दस्तावेजों को स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है। विशेष रूप से ऐसी जानकारी साझा करने पर रोक है, जो सरकारी नियमों के तहत गोपनीय या सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हो। साथ ही सरकारी दस्तावेजों को ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल्स पर अपलोड नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

संवेदनशील ड्यूटी और लोकेशन की जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी

 

संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी, कार्य की प्रकृति और कार्यस्थल आदि की जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे। ऐसे स्थानों पर लोकेशन और जियो-टैगिंग को भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की संभावना को रोका जा सके।

 

व्यक्तिगत प्रचार और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक

 

परिपत्र में बिना शासन की पूर्व अनुमति के अपने नाम, परिजनों के नाम अथवा छद्म नाम से प्रोफाइल बनाकर पेड प्रमोशन या अकाउंट मॉनेटाइजेशन पर रोक लगाई गई है। सरकारी अथवा व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी निजी व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा का प्रचार-प्रसार भी प्रतिबंधित किया गया है। सोशल मीडिया से किसी प्रकार की आय प्राप्त होने पर उसका पूरा विवरण विभाग को 30 दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

अपराध जांच से जुड़ी जानकारी पोस्ट करने पर रोक

 

किसी शिकायत, जांच, विवेचना या जनसुनवाई के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, अनावेदक अथवा आरोपी के फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट या लाइव नहीं किए जाएंगे। आवश्यक स्थिति में चेहरा ब्लर करने और अनुमति के बाद ही सामग्री पोस्ट करने की बात कही गई है। इसी तरह जिस अपराध की विवेचना चल रही हो या मामला न्यायालय में लंबित हो, उससे संबंधित ऐसी जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रभावित होने की स्थिति बने।

 

महिला-बालिका पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर रोक

 

दुष्कृत्य एवं यौन हिंसा से पीड़ित महिला-बालिका तथा किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आने वाले बच्चों से संबंधित फोटो, वीडियो अथवा पहचान उजागर करने वाली सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की जाएगी।

 

हथियार, प्रशिक्षण और संवेदनशील कार्रवाई के फोटो-वीडियो भी प्रतिबंधित

 

विशिष्ट अथवा अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को महत्वपूर्ण स्थानों के फोटो या सेल्फी पोस्ट नहीं करने के निर्देश हैं। हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और अन्य संवेदनशील पुलिस कार्रवाई के फोटो-वीडियो पोस्ट या लाइव करना भी पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है।

 

परिपत्र में पुलिस विभाग की उपलब्धियों को किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं करने की हिदायत दी गई है। गलत, अनधिकृत अथवा अपुष्ट तथ्यों पर सोशल मीडिया समूहों में प्रतिक्रिया देने से भी पुलिसकर्मियों को बचने को कहा गया है।

 

इसके अलावा न्यायालयीन निर्देशों और निर्णयों पर ऐसी टिप्पणी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे न्यायालय की अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो। संदिग्ध या आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को सोशल मीडिया पर फॉलो या उनके साथ फोटो-वीडियो साझा करने पर भी रोक लगाई गई है।

 

राजनीतिक प्रतीकों और ऑनलाइन पोल में भागीदारी पर भी दिशा-निर्देश

 

पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के सांकेतिक विरोध से जुड़े प्रतीक या चिन्ह सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर अथवा डीपी में इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है। प्रोफाइल पिक्चर या डीपी में किसी संगठन अथवा राजनीतिक पार्टी के लोगों या प्रतीकों का उपयोग भी प्रतिबंधित किया गया है। सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट से बिना अनुमति ऑनलाइन वोटिंग या ऑनलाइन पोल में भाग नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं। परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया का उपयोग करते समय पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विभागीय अनुशासन, गोपनीयता, सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखना होगा।

 

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