— 15वें और 5वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग पर सवाल, सीसी सड़क निर्माण और सामग्री खरीदी के भुगतान की निष्पक्ष जांच की मांग
डिंडौरी। जिले के अमरपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत अलौनी में 15वें एवं 5वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और भुगतान विवरण के भुगतान प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। सरपंच गजेंद्र सिंह ठाकुर और सचिव माखन सिंह द्वारा वित्तीय नियमों को दरकिनार करते हुए निर्माण कार्यों में सामग्री का भुगतान आकस्मिक (कंटिजेंसी) बिलों के माध्यम से किया गया। वहीं सड़क निर्माण कार्यों में एक ही प्रकार के कार्य के लिए अलग-अलग वर्क आईडी से भुगतान दर्ज होने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल आकस्मिक (कंटिजेंसी) मद का उपयोग सामान्यतः छोटे एवं अप्रत्याशित कार्यालयीन खर्चों के लिए किया जाता है, जबकि निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री का भुगतान निर्धारित प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए।
— सरकार की पारदर्शिता व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकार ने पंचायतों में होने वाले प्रत्येक भुगतान को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पंचायत दर्पण पोर्टल पर संबंधित बिल, वाउचर और अन्य दस्तावेज ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था लागू की है, ताकि आम नागरिक भी भुगतान का पूरा विवरण देख सकें। लेकिन आरोप है कि ग्राम पंचायत अलौनी में इस व्यवस्था की मंशा को दरकिनार करते हुए निर्माण सामग्री का भुगतान आकस्मिक बिलों के माध्यम से किया गया। इससे सामग्री की वास्तविक खरीदी, जीएसटी, विक्रेता का विवरण और भुगतान की वैधता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
— सादे बिलों में लाखों का भुगतान
पंचायत के भुगतान रिकॉर्ड के अनुसार सीसी सड़क, तार फेंसिंग एवं अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर ₹52 हजार, ₹32 हजार, ₹65 हजार, ₹82,400 सहित कई भुगतान आकस्मिक बिलों के माध्यम से किए गए हैं। आरोप है कि कई भुगतान सादे कागजों पर तैयार किए गए बिलों के आधार पर किए गए, जिनमें सामग्री की दर, जीएसटी और विक्रेता संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। इससे सरकारी राशि के उपयोग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

— एक सड़क पर दो वर्क आईडी से ₹3.84 लाख का भुगतान
15वें वित्त आयोग के तहत सड़क निर्माण के लिए वर्क आईडी 117004554 पर ₹2,45,000 और वर्क आईडी 117004839 पर ₹1,39,000 का भुगतान दर्ज है। दोनों वर्क आईडी में सड़क निर्माण दर्ज है और दोनों का पंजीयन 03 फरवरी 2025 को हुआ है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार दोनों में अपलोड की गई तस्वीरें भी एक जैसी सड़क की दिखाई देती हैं। यदि जांच में यह एक ही सड़क का कार्य पाया जाता है, तो यह स्पष्ट करना होगा कि दो अलग-अलग वर्क आईडी बनाकर कुल ₹3.84 लाख का भुगतान किस आधार पर किया गया।
— ₹2 लाख की सीसी सड़क के भुगतान पर भी सवाल
इसी प्रकार वर्क आईडी 106757667 के तहत 15वें वित्त आयोग से सीसी सड़क निर्माण के लिए ₹2 लाख का भुगतान दर्ज है। भुगतान विवरण में ₹1-1 लाख की दो किश्तें दिखाई देती हैं। जिसमें पूरी भुगतान सप्लायर को किया गया। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि निर्माण कार्य में नियमानुसार मजदूर लगाए गए थे या नहीं ओर मस्टर रोल और अन्य अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं। क्या बिना निर्माण के ही भुगतान कर दिया गया.?
बता दें कि यह पूरा मामला सार्वजनिक धन के उपयोग, वित्तीय अनुशासन और पंचायतों में पारदर्शिता से जुड़ा है। यदि भुगतान नियमानुसार हुआ है तो संबंधित अधिकारियों को माप पुस्तिका (एमबी), तकनीकी स्वीकृति, मस्टर रोल, बिल-वाउचर और अन्य अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत में जिम्मेदारों के द्वारा इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या मामला फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।





