— नौकरी के बदले झूठा शपथपत्र लिखवाने का आरोप, कलेक्टर से शिकायत…
डिंडौरी। जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पौड़ी, ग्राम पंचायत किवाड़ निवासी मायावती मरावी ने कलेक्टर डिंडौरी को लिखित आवेदन देकर महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक स्वपनिलपुरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदिका ने आरोप लगाया है कि पर्यवेक्षक ने नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनसे परियोजना अधिकारी और चपरासी के विरुद्ध झूठे आरोपों वाला शपथपत्र लिखवाने का दबाव बनाया।
आवेदन में मायावती मरावी ने बताया कि उनका नाम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की चयन वरीयता सूची में प्रथम स्थान पर है। इसके बावजूद 3 जनवरी 2026 को पर्यवेक्षक स्वपनिलपुरी ने उन्हें दस्तावेज जांच के बहाने समनापुर स्थित अपने निवास पर बुलाया। वहां पर्यवेक्षक ने कथित रूप से यह कहा कि “मैं परियोजना अधिकारी बन गई हूं, जैसा मैं कहूंगी वैसा करोगी तभी तुम्हारी नियुक्ति होगी।”
आवेदिका का आरोप है कि पर्यवेक्षक द्वारा परियोजना अधिकारी श्री अयोध्या सिंह राठौर एवं चपरासी कुलपत यादव के खिलाफ रिश्वत मांगने के झूठे आरोप लगवाने का दबाव बनाया गया। उनसे कहा गया कि तयशुदा भाषा में नोटरी के माध्यम से शपथपत्र तैयार कर एक-एक प्रति कलेक्टर और जिला अधिकारी को दी जाए, अन्यथा नियुक्ति नहीं दी जाएगी।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यवेक्षक ने दसवंती केवटिया नामक महिला के समग्र आईडी और पंचायत परिवर्तन से जुड़ी जानकारी को तोड़-मरोड़ कर लिखवाने का प्रयास किया। आवेदिका के अनुसार, वास्तविक तथ्य यह है कि वरीयता सूची आने तक संबंधित महिला का नाम ग्राम पंचायत किवाड़ में ही दर्ज था, लेकिन पर्यवेक्षक ने इसे गलत तरीके से प्रस्तुत कर अपात्र साबित करने का दबाव बनाया।
मायावती मरावी ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि परियोजना अधिकारी या चपरासी द्वारा उनसे किसी भी प्रकार की राशि की मांग नहीं की गई है और लगाए जा रहे आरोप पूर्णतः असत्य हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पर्यवेक्षक के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले में आंगनवाड़ी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक अभ्यर्थी के भविष्य से खिलवाड़ का मामला है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि कलेक्टर स्तर से इस संवेदनशील मामले में क्या जांच कराई जाती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।




