— घोषणापत्र में शामिल वादे अधूरे, पेसा मोबीलाइज़र का बढ़ा मानदेय और रोजगार सहायकों के अधिकार बने बड़ा मुद्दा
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में ग्राम पंचायतों में कार्यरत पेसा मोबीलाइज़र एवं रोजगार सहायकों से जुड़े लंबित मामलों को लेकर सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विधायक नारायण सिंह पट्टा (क्षेत्र क्रमांक 105) ने विधानसभा नियम 138(1) के तहत ध्यानाकर्षण सूचना देकर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का ध्यान इस गंभीर और अविलंबनीय सार्वजनिक महत्व के विषय की ओर आकर्षित किया।
विधायक ने सदन को अवगत कराया कि पेसा मोबीलाइज़रों को 8,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा की गई थी, जिसे वर्तमान सरकार के घोषणा पत्र में भी शामिल किया गया। इसके बावजूद आज तक यह घोषणा धरातल पर नहीं उतर पाई है। इतना ही नहीं, बीते कई महीनों से पेसा मोबीलाइज़रों को उनका निर्धारित मानदेय भी नियमित रूप से नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ध्यानाकर्षण सूचना में यह भी उल्लेख किया गया कि रोजगार सहायकों के पदनाम को सहायक सचिव किए जाने, भर्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने और सेवा नियम सचिवों के समान करने की घोषणाएं भी अब तक अधूरी हैं। इन वादों के पूरा न होने से रोजगार सहायकों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। विधायक पट्टा ने अध्यक्ष महोदय से इस विषय को सदन में उठाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है, ताकि सरकार से स्पष्ट जवाब लेकर लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय कराया जा सके।

