डिंडौरी। आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताज़ा उदाहरण ग्राम पंचायत धवाडोंगरी से सामने आया है। यहां कागज़ों में सड़कें, पुलिया और स्टॉपडैम बन गए, लेकिन ज़मीनी हकीकत में ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालते नजर आ रहे हैं।
दरअसल विकासखंड करंजिया की ग्राम पंचायत धवाडोंगरी में ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान पूर्व सरपंच दूजाबाई मसराम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय निर्माण कार्यों की स्वीकृति लेकर लाखों रुपये की राशि आहरित कर ली गई, लेकिन मौके पर कोई कार्य नहीं कराया गया। इससे न केवल शासन के नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई, बल्कि ग्रामीणों के साथ आर्थिक शोषण भी किया गया।
ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार वर्ष 2021-22 में दीपक के घर से नंदलाल के घर तक सीसी रोड निर्माण के लिए लगभग 2.50 लाख रुपये निकाले गए, जबकि आज तक सड़क का नामोनिशान नहीं है। वर्ष 2017 में धनसाय के घर से हिन्दू के घर तक सीसी रोड के लिए 5.84 लाख रुपये आहरित किए गए, लेकिन कार्य अधूरा या नगण्य बताया जा रहा है। इसी तरह वर्ष 2016 में भुरी टोला रोड पर देवसिंह के खेत के पास पुलिया निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये निकाले गए, परंतु स्थल पर कोई पुलिया नहीं बनी। वहीं जनभागीदारी योजना अंतर्गत पटपरहा नाला, टिमकी टोला में स्टॉपडैम निर्माण के नाम पर करीब 10 लाख रुपये की राशि निकाल ली गई, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि वहां कोई निर्माण कार्य हुआ ही नहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सभी कार्यों में पूरी राशि का आहरण कर लिया गया, लेकिन धरातल पर या तो काम हुआ ही नहीं या फिर सिर्फ दिखावे के लिए किया गया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी पूर्व में भी प्रशासन को दी गई थी, लेकिन आज तक न तो जांच हुई और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई।
वहीं अब ग्रामवासियों ने उच्च स्तरीय तकनीकी और वित्तीय जांच की मांग करते हुए संबंधित स्थलों का पंचनामा तैयार कराने, गबन की गई राशि की वसूली करने और दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार कागज़ी विकास की परतें हटाकर भ्रष्टाचार के जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?


