डिंडौरी। शहपुरा ब्लॉक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत दी जा रही प्रोत्साहन राशि को लेकर गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहपुरा के स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शाहपुरा को शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीते तीन वर्षों से प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत बीएमओ सत्येंद्र परस्ते द्वारा चिकित्सक के रूप में बेहद कम सेवाएं देने के बावजूद अन्य चिकित्सकों की तुलना में कई गुना अधिक आयुष्मान प्रोत्साहन राशि प्राप्त की गई। जबकि उक्त अवधि में उनका नाम डॉक्टर ड्यूटी रोस्टर में भी दर्ज नहीं रहा।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि मेडिकल स्पेशलिस्ट के रूप में प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री अनिवार्य होने के बावजूद केवल ग्रेजुएट डिग्री के आधार पर स्वयं को स्पेशलिस्ट दर्शाकर प्रोत्साहन राशि ली गई। इसके अतिरिक्त, शिकायत में कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों को एक वर्ष से अधिक समय तक मातृत्व अवकाश पर रखे जाने के बावजूद उस अवधि के दौरान भर्ती हुए मरीजों की प्रोत्साहन राशि भी आवंटित की गई, जो नियमों के विरुद्ध है।
एक अन्य आरोप में बताया गया है कि आशुतोष रजक द्वारा वर्षों से वार्ड बॉय के रूप में सेवाएं नहीं देने के बावजूद, बीएमओ के करीबी होने के कारण उनके खाते में वार्ड बॉय के रूप में प्रोत्साहन राशि डाली गई। वहीं, कुछ कर्मचारियों का अन्यत्र स्थानांतरण होने के बाद भी उन्हें शहपुरा ब्लॉक से आयुष्मान प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया गया। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने एसडीएम से मांग की है कि शहपुरा ब्लॉक में आयुष्मान प्रोत्साहन राशि के मनमाने आवंटन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।




