मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में नरेगा के काम ठप पड़ने के बाद अब ग्राम पंचायतों में पाँचवें और पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि ही विकास कार्यों का मुख्य आधार बन गई है। लेकिन इन निधियों पर सरपंच और सचिव का एकछत्र अधिकार होने से मनमाने भुगतान और फर्जी खर्चों का खेल खुलकर सामने आ रहा है। विकास निधि का उद्देश्य जनता की भलाई है, मगर जिस तरह इसका दुरुपयोग किया जा रहा है, उससे ग्रामीणों में नाराज़गी और सवाल खड़े हो रहे हैं।
ताजा मामला अमरपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जल्दा मुढ़िया का प्रकाशन में आया है, जहां सरपंच सुनीता बाई और सचिव नंदकुमार गौतम ने मिलीभगत कर भारी गड़बड़ी की गई है। पंचायत को प्राप्त निधि का खर्च शासन द्वारा तय नियमों और मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत बने क्रय नियमों की खुली अवहेलना करते हुए किया गया। बता दें कि जिम्मेदारों अपने चहेते सप्लायरों और फर्मों को लाभ पहुँचाने के लिए बिना प्रयोजन, बिना जीएसटी और नियम विरुद्ध लाखों रुपए का भुगतान किया। मजे की बात यह कि जिन्हें पंचायत से मजदूरी का भुगतान किया गया, उसी वेंडर से लाखों रुपए की सामग्री खरीदी का फर्जी बिल लगाकर भुगतान किया गया है।
गौरतलब यह है कि पंचायत भृत्य कार्तिक राम के नाम पर लगभग ₹2,18,500 से अधिक खर्च दिखाए गए। इसमें फोटोकॉपी, मटेरियल खरीदी, मजदूरी भुगतान, मरम्मत कार्य और अन्य व्यय के नाम पर ₹9,000, ₹20,000, ₹13,500, ₹79,000, ₹26,000, ₹5,000, ₹8,000 जैसी कई संदिग्ध रकम शामिल हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि ग्राम पंचायत में भृत्य आखिर सप्लायर कैसे बन गया और क्या यह पंचायत निधि की बंदरबांट करने का नया तरीका नहीं है।
इतना ही नहीं, पंद्रहवें वित्त आयोग की टाईट और अनटाईट राशि का भी गलत उपयोग कर “अन्य व्यय” के नाम पर नजदीकी सप्लायरों को भुगतान किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी निधि के दुरुपयोग और लाखों रुपए की बंदरबांट की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा ठोस कार्रवाई न होने से सरपंच–सचिव के हौसले बुलंद हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्राम पंचायतों की विकास निधि मनमाने ढंग से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेगी और कब जिम्मेदार अधिकारी इस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
इनका कहना है “
हमारे द्वारा पक्का और जीएसटी वाला बिल मांगा गया था आगे से ऐसी गलती नहीं करेंगे।
— सुनीता बाई, सरपंच ग्राम पंचायत जल्दा मुढ़िया जनपद पंचायत अमरपुर।
सभी ग्राम पंचायतों में ऐसा ही भुगतान किया जा रहा है। हम अपने साहब को जवाब दे देंगे।
— नंदकुमार कुमार गौतम, सचिव ग्राम पंचायत जल्दा मुढ़िया।




