– जीएसटी अधिनियम की उड़ाई धज्जियां, जिम्मेदारों ने आंख बंद कर किया करोड़ों का भुगतान..
मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के विकासखंड अमरपुर अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में शासन को आंखों में धूल झोंकते हुए लाखों-करोड़ों रुपए के गबन का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। “उमेश ट्रेडर्स” नामक फर्म द्वारा जीएसटी नंबर निरस्त होने के बावजूद पंचायतों से भुगतान प्राप्त कर टैक्स प्रणाली की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत चौरा निवासी उमेश कुमार ने अपनी फर्म “उमेश ट्रेडर्स” के नाम से अमरपुर क्षेत्र की कई पंचायतों से बिल्डिंग मटेरियल – सीमेंट, गिट्टी, पाइप, दरवाजे-खिड़की, टाइल्स आदि की आपूर्ति के नाम पर फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपए का भुगतान लिया। जबकि रिकॉर्ड बताता है कि इस फर्म का जीएसटी पंजीयन 31 जुलाई 2020 को ही रद्द कर दिया गया था।

इसके बावजूद पंचायतों ने इस निरस्त GST नंबर के बिलों के आधार पर भुगतान कर दिया, जो न केवल शासन के नियमों की अनदेखी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संबंधित पंचायत सचिवों और अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़े पर जानबूझकर चुप्पी साधे रखी। GST अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए इस प्रकार का भुगतान वर्षों से जारी है। अब तक करोड़ों रुपए का गबन हो चुका है और शासन को भारी वित्तीय क्षति उठानी पड़ रही है।
ज्ञात हो कि 2017 में केंद्र सरकार ने ‘एक देश, एक टैक्स’ के सिद्धांत पर GST लागू किया था ताकि टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सके। लेकिन अमरपुर क्षेत्र में सप्लायर द्वारा जीएसटी के दायरे से बाहर रहकर भी भुगतान लिया जाना, इस प्रणाली को ही कठघरे में खड़ा करता है।
वहीं अब सवाल यह उठता है कि –निरस्त GST नंबर से भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ? पंचायत सचिवों व अन्य अधिकारियों की भूमिका क्या रही? क्या शासन इस पर कड़ी कार्रवाई करेगा या यह मामला भी दबा दिया जाएगा? लोगों का कहना है कि यह मामला न केवल प्रशासन की लापरवाही उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं और धनराशि में किस हद तक फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार पनप चुका है।
