— एक पुल बह गया, दूसरा भी टूटने की कगार पर… खेतों में भरा मलबा, किसान पूछ रहे— हमारी मेहनत का हिसाब कौन देगा?
डिंडौरी। बरसात की हर बूंद किसानों के लिए उम्मीद लेकर आती है, लेकिन डिंडौरी जिले के चाबी–मेंहदवानी से कुशेरा मार्ग के किनारे रहने वाले कई किसानों के लिए यही बारिश दर्द और बेबसी की कहानी बन गई। करोड़ों रुपये की लागत से बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़क पर बना पुल तेज बारिश का सामना नहीं कर सका और देखते ही देखते धराशाई हो गया। वहीं भुरका में बना दूसरा पुल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त है और उसके भी कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है।

जिस सड़क को ग्रामीणों की जिंदगी आसान बनाने के लिए बनाया गया था, वही अब चिंता और डर का कारण बन गई है। मौके पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार 12.10 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर करीब 7 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन पहली ही तेज बारिश में पुल का ढह जाना निर्माण गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

सबसे ज्यादा दर्द उन किसानों का है, जिनके खेतों में पुल का मलबा और बारिश का तेज बहाव पहुंच गया। कहीं खड़ी फसल बर्बाद हो गई तो कहीं खेतों की मिट्टी बह गई। जिन खेतों को सींचने के लिए किसान दिन-रात मेहनत करते हैं, आज वही खेत मलबे से पटे पड़े हैं। किसानों की आंखों में एक ही सवाल है— हमारी मेहनत की भरपाई कौन करेगा?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ किया गया होता तो करोड़ों रुपये का पुल पहली ही बारिश में नहीं टूटता। उनका आरोप है कि यदि समय रहते दूसरे क्षतिग्रस्त पुल की जांच और मरम्मत नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दोनों पुलों की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाए और जिन किसानों की फसलें व खेत क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका सर्वे कराकर शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए। अब सवाल केवल एक पुल के गिरने का नहीं है, बल्कि उन ग्रामीणों के टूटते भरोसे का भी है, जिन्होंने विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की परियोजना से मजबूत सड़क और सुरक्षित सफर की उम्मीद की थी।




