— महिला संविदा कर्मियों को राहत, विशेष परिस्थितियों में मिलेगा अंतरजिला स्थानांतरण
भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने विभाग के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों में कार्यरत संविदा कर्मियों के लिए स्थान परिवर्तन (स्थानांतरण) की नई नीति जारी कर दी है। शासन द्वारा जारी आदेश में पहली बार संविदा कर्मचारियों के स्थानांतरण के लिए स्पष्ट नियम और शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित हो सके।
— जारी आदेश के मुताबिक
जारी नीति के अनुसार स्थान परिवर्तन की स्थिति में कर्मचारी का पूर्व संविदा अनुबंध समाप्त माना जाएगा और नए कार्यस्थल पर नया अनुबंध निष्पादित किया जाएगा। एक बार स्थान परिवर्तन होने के बाद संबंधित कर्मचारी का पुनः स्थानांतरण पांच वर्ष तक नहीं किया जा सकेगा। साथ ही स्थानांतरण केवल शासन द्वारा निर्धारित स्थानांतरण अवधि में ही किए जाएंगे।
नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर कर्मचारी को कार्यमुक्त करना होगा तथा नए पदस्थापना स्थल पर भी एक सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य रहेगा। स्थान परिवर्तन के लिए किसी प्रकार का यात्रा भत्ता, अन्य भत्ते अथवा विशेष अवकाश का लाभ नहीं दिया जाएगा।
जिले के भीतर स्थानांतरण की प्रक्रिया के तहत 1 जून से 15 जून 2026 तक कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद स्थान परिवर्तन किए जा सकेंगे। ऐसे आदेश जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। किसी भी जिले में संबंधित पद पर कार्यरत कुल संविदा कर्मचारियों की अधिकतम 10 प्रतिशत संख्या तक ही स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
अंतरजिला स्थानांतरण केवल स्वेच्छिक आवेदन पर विशेष परिस्थितियों में ही संभव होगा। इसमें विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिलाओं को उनके परिवार अथवा ससुराल वाले जिले में पदस्थापना, स्वयं या आश्रित को कैंसर अथवा ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी होने की स्थिति तथा समान पद पर कार्यरत कर्मचारियों के पारस्परिक स्थान परिवर्तन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। विशेष प्रशासनिक आवश्यकताओं में विभागीय मंत्री की स्वीकृति से भी अंतरजिला स्थानांतरण किया जा सकेगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी परिषद तथा राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन के संविदा कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी। शासन के इस निर्णय को संविदा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लंबे समय से लंबित स्थानांतरण संबंधी मांगों को एक व्यवस्थित स्वरूप मिल सकेगा। देखे आदेश…


