मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में संचालित सभी शासकीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए कलेक्टर नेहा मारव्या ने अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निरीक्षण केवल औपचारिकता न होकर गंभीरता और नियमितता से किया जाए, ताकि छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि अधिकारियों को अपने नियमित कार्यों के साथ-साथ छात्रावासों का सतत निरीक्षण करना होगा। निरीक्षण के दौरान भोजन, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा, अध्ययन सामग्री, विद्युत आपूर्ति, पलंग, चादर, खिड़कियों में जाली, सीसी कैमरा और भवन मरम्मत जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि माह के अंत में निरीक्षण प्रतिवेदन की समीक्षा की जाएगी। जिन छात्रावासों में पानी, शौचालय, भवन मरम्मत, या अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी पाई जाती है, वहां संबंधित छात्रावास अधीक्षक और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग के समन्वय से तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
कलेक्टर ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो अधीक्षक बार-बार निर्देश देने के बावजूद लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारी और अधीक्षकों को निर्देश दिए कि नल-जल योजना के कनेक्शन उन छात्रावासों में अवश्य जोड़े जाएं, जहां पानी की समस्या है। साथ ही, बच्चों को मीनू के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए।
इसके साथ ही, जिन छात्रावासों तक पहुंचने के लिए केवल कच्चा रास्ता है, वहां सुरक्षित पक्की सड़क निर्माण की कार्यवाही तत्काल शुरू करने के भी निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने विभाग प्रमुखों से कहा कि अपने निरीक्षण दौरों के दौरान रास्ते में पड़ने वाले शैक्षणिक संस्थानों का भी निरीक्षण करें, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित हो सके।



