— 22 जून से शुरू हुई प्रक्रिया, जुलाई के पहले सप्ताह तक होगी अतिथि शिक्षकों की उपस्थिति
भोपाल । लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। 21 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार विद्यालयों में वास्तविक आवश्यकता के आधार पर रिक्तियों का प्रमाणीकरण कर अतिथि शिक्षकों को आमंत्रित किया जाएगा।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की अनुपलब्धता की स्थिति में ही वास्तविक आवश्यकता के अनुसार लॉन्ग टर्म रिक्तियों की प्रविष्टि की जाएगी। विद्यालय के शाला प्रभारी को उपलब्ध कक्षाओं, समय-सारणी और कुल अध्यापन कालखंडों के आधार पर आवश्यकता का निर्धारण करना होगा। केवल पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्त पदों के आधार पर प्रमाणीकरण नहीं किया जाएगा, बल्कि वास्तविक आवश्यकता को प्राथमिकता दी जाएगी।
— जारी आदेश के मुताबिक
आदेश के अनुसार बी.एड./एम.एड. पाठ्यक्रम में अध्ययनरत नियमित शिक्षकों के कारण उत्पन्न अतिरिक्त रिक्तियों को भी आवश्यकता होने पर संकुल प्राचार्य द्वारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। अतिथि शिक्षकों के आमंत्रण की प्रक्रिया जीएफएमएस (GFMS) पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रमाणित रिक्तियों के विरुद्ध ही अतिथि शिक्षकों को विद्यालयों में उपस्थित कराया जाएगा। पिछले सत्र में कार्यरत अतिथि शिक्षक 30 जून से 2 जुलाई 2026 तक पोर्टल पर उपस्थिति हेतु रिक्वेस्ट दर्ज कर सकेंगे, जबकि शाला प्रभारी 1 जुलाई से 3 जुलाई तक इन अनुरोधों का सत्यापन करेंगे।
निर्धारित समय-सारणी के अनुसार 22 जून से 29 जून तक विद्यालय स्तर पर लॉन्ग टर्म रिक्तियों का अद्यतन और अतिरिक्त रिक्तियों की मांग दर्ज की जाएगी। इसके बाद 30 जून 2026 को राज्य स्तर से GFMS पोर्टल पर रिक्तियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अतिथि शिक्षक केवल उसी पैनल में उपस्थिति हेतु आवेदन कर सकेंगे, जिसमें उनका स्कोर कार्ड उपलब्ध है। यदि किसी पैनल में रिक्तियों की संख्या कम होगी तो उच्च स्कोर वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों, जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
