मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा डिंडौरी जिले में नर्मदा परिक्रमा पथ के चिन्हित स्थलों पर आश्रय स्थल निर्माण तथा नदियों के उद्गम स्थलों पर वृक्षारोपण के लिए तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। इस संबंध में जिला पंचायत सभाकक्ष में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श अनिल कुमार राठौर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, उपयंत्री, सहायक यंत्री एवं जनपद पंचायतों के सीईओ उपस्थित रहे।
उद्गम स्थलों पर फेंसिंग और वृक्षारोपण को मिली स्वीकृति
डिंडौरी जिले से निकलने वाली सात प्रमुख नदियों — बुढनेर (चांडा, बजाग), तुराड (चौरादादर, करंजिया), लमती (धनुवासागर, डिंडौरी), सिलगी (छिवलीमाल), दनदना (राई, मेंहदवानी), छोटी महानदी (टिकरासरई, शहपुरा) और कसा नदी (संग्रामपुर) के उद्गम स्थलों पर फेंसिंग और वृक्षारोपण का कार्य कराया जाएगा। इस कार्य के लिए शासन द्वारा आवश्यक बजट और कार्ययोजना की स्वीकृति प्रदान की गई है।
नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों का होगा निर्माण
नर्मदा परिक्रमा पथ पर यात्रियों की सुविधा के लिए चिन्हित ग्राम पंचायतों में आश्रय स्थलों के लिए भूमि चिन्हित कर फेंसिंग और वृक्षारोपण की स्वीकृति दी गई है। यह कार्य जनपद पंचायत अमरपुर, डिंडौरी, बजाग, करंजिया और शहपुरा अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों — जैसे रमपुरी, उदरी माल, केवलारी, रूसा, गारकामट्टा, मालपुरमाल आदि — में किया जाएगा।
निर्देशों का पालन अनिवार्य, नहीं होगा राशि का अन्य उपयोग
सीईओ जिला पंचायत राठौर ने निर्देशित किया कि सभी संबंधित ग्राम पंचायतें शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य प्रारंभ करें। कार्य प्रारंभ से पूर्व भूमि का राजस्व रिकॉर्ड से सत्यापन, आरक्षण एवं आवंटन कराते हुए पंचायत दर्पण पोर्टल पर वर्क कोड बनाना आवश्यक होगा। किसी अन्य कार्य में स्वीकृत राशि का उपयोग नहीं किया जा सकेगा, और कार्य निरस्त होने की स्थिति में राशि शासन को लौटानी होगी। कार्य की निगरानी हेतु जनपद पंचायतों के सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्थल परिवर्तन की स्थिति में मांगा जाएगा विस्तृत प्रतिवेदन
यदि किसी स्थान पर कार्य संभावित नहीं है तो उस स्थिति में ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, उपयंत्री एवं सीईओ जनपद पंचायत की संयुक्त अनुशंसा के साथ विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और परिक्रमा पथ की संरचना को मजबूती मिल सके।
पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा की दिशा में अहम कदम
यह योजना डिंडौरी जिले में पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन तथा ग्राम स्तर पर हरित विकास को बढ़ावा देने का एक सशक्त प्रयास है। नर्मदा परिक्रमा जैसे धार्मिक महत्व के मार्ग को संरक्षित करना और साथ ही जल स्रोतों के मूल स्थानों को सुरक्षित कर वृक्षारोपण करना जिले की स्थायी विकास नीति की एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
