डिंडौरी। जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित निर्माण कार्यों में गंभीर लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर (जिला पंचायत) डिण्डौरी ने कार्यपालन यंत्री ग्रा.यो. सेवा संभाग डिंडौरी ललित वैद्य को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। बता दें कि यह कार्रवाई 6 फरवरी 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उजागर हुई अनियमितताओं के आधार पर की गई है।
समीक्षा में पाया गया कि जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत कई स्वीकृत निर्माण कार्य लंबे समय से अपूर्ण अथवा प्रारंभ ही नहीं किए गए हैं। वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में स्वीकृत नवीन सामुदायिक भवनों में से कई कार्य आज दिनांक तक अप्रारंभ पाए गए, जबकि कुछ केवल नींव स्तर पर हैं और स्वीकृति को एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। इसी तरह वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 18 नवीन पंचायत भवनों में से एक भी भवन पूर्ण नहीं हुआ, जबकि तीन पंचायत भवन अभी तक प्रारंभ नहीं किए गए हैं।
आंगनबाड़ी भवनों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई, जहां विभिन्न वर्षों में स्वीकृत 11 आंगनबाड़ी भवन आज भी अप्रारंभ हैं तथा 72 भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। विधायक निधि अंतर्गत वर्ष 2023-24 के 21 और वर्ष 2024-25 के 20 कार्य भी अब तक अपूर्ण हैं।
मनरेगा योजना के तहत जिले में लक्षित 86.24 लाख लेबर बजट के विरुद्ध अब तक मात्र 61.96 लाख मानव दिवस सृजित हो पाए हैं, जो लगभग 71.85 प्रतिशत है। इसके बावजूद लेबर नियोजन बढ़ाने के लिए दिए गए लगातार निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं किया गया। गंगा जल संवर्धन अभियान में भी 4073 स्वीकृत कार्यों के मुकाबले केवल 928 कार्य ही पूर्ण हो पाए हैं। वहीं, मनरेगा अंतर्गत विभागीय सुदूर सड़क के कार्य वर्षों से प्रगतिरत रहने के बावजूद उन्हें पूर्ण कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
कलेक्टर ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों की निगरानी, समन्वय और समयसीमा में पूर्णता सुनिश्चित करने में कार्यपालन यंत्री द्वारा अपेक्षित रुचि नहीं ली गई, जो मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत है। इस संबंध में वैद्य को 12 फरवरी 2026 तक अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय-सीमा में जवाब नहीं मिलने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


