मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि के बीच टकराव सामने आया है। जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी के बीच हुआ विवाद अब पुलिस जांच का विषय बन गया है। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्रता और अपमानजनक व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार 17 दिसंबर को जिला पंचायत कार्यालय में निर्माण कार्यों की राशि जारी करने तथा ‘मां की बगिया’ योजना के अंतर्गत लगाए जा रहे पौधों की गुणवत्ता को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान हुई कहासुनी देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई।
जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी ने पुलिस अधीक्षक डिंडौरी को सौंपे लिखित आवेदन में बताया कि वे अपने कक्ष में शासकीय कार्य कर रहे थे, तभी जिला पंचायत अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे और निर्माण कार्यों की राशि शीघ्र जारी करने का दबाव बनाने लगे। सीईओ के अनुसार उन्होंने पहले ही इस विषय पर 22 दिसंबर को बैठक तय होने की जानकारी अध्यक्ष को दे दी थी, इसके बावजूद कथित रूप से तेज आवाज में दबाव बनाया गया।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष ने टेबल ठोकी, अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया, गाली-गलौज की और धमकी भी दी। घटना के दौरान कार्यालय में अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे। सीईओ का कहना है कि इस घटनाक्रम से उनकी सार्वजनिक छवि और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इस मामले में जिला पंचायत के अधिकारी-कर्मचारियों ने भी सीईओ के समर्थन में पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर विरोध दर्ज कराया है।
दूसरी ओर जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते ने भी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। अध्यक्ष का आरोप है कि सीईओ ने एक जनप्रतिनिधि के साथ अभद्र व्यवहार किया और जानबूझकर उन्हें अपमानित किया। पूरे मामले को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जिला पंचायत अध्यक्ष के द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




