भोपाल/उज्जैन। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के साथ बड़े पैमाने पर की गई बीमा धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस घोटाले में बीमा एजेंट, पॉलिसी धारकों के नॉमिनी और लोकसेवक शामिल पाए गए हैं, जिन्होंने मिलकर करीब 8 करोड़ रुपये के फर्जी क्लेम की साजिश रची।
— जारी प्रेस नोट के मुताबिक
जांच में सामने आया कि मन्दसौर और उज्जैन क्षेत्र में कई बीमा पॉलिसियां ऐसे लोगों के नाम पर जारी की गईं, जो पहले से गंभीर बीमारी से ग्रसित थे या जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। इन तथ्यों को छुपाकर बीमा कराया गया और बाद में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर क्लेम प्रस्तुत किया गया।
EOW की जांच में कुल 27 पॉलिसियों की पड़ताल की गई, जिनमें से 19 मामलों में गंभीर बीमारी की जानकारी छुपाकर बीमा कराया गया, जबकि 8 मामलों में मृत व्यक्तियों को जीवित दर्शाकर पॉलिसी ली गई। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनी से दावा राशि हासिल करने का प्रयास किया गया।
इस पूरे मामले में कुछ ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और सहायक सचिवों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि इन लोकसेवकों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर आरोपियों को अवैध लाभ दिलाने में सहयोग किया।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने इस मामले में कई बीमा एजेंटों, नॉमिनी और लोकसेवकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं—417, 420, 467, 468, 471, 120बी—सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना जारी है। यह मामला बीमा क्षेत्र में बड़े स्तर पर हो रही धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है, जिसमें संगठित तरीके से नियमों का दुरुपयोग कर कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
