मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में आदिवासी क्षेत्र की उम्मीदें जिन कंधों पर टिकी थीं, वही कंधे आज जिम्मेदारी के बोझ से नहीं, नशे के धुएँ में डूबे नज़र आ रहे हैं। डॉक्टर, जिसे समाज जीवनदाता कहता है, जब वही अपनी संवेदनशीलता खो दे, तो यह केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं — यह व्यवस्था की विफलता का आईना है। नशामुक्ति के नारे तब बेमानी लगते हैं जब नशा करने वाले खुद सिस्टम के हिस्से बन जाएँ। सवाल सिर्फ एक वीडियो का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जो आम आदमी सरकारी अस्पताल की चौखट पर लेकर आता है।
वायरल वीडियो…..
दरअसल आदिवासी बहुल क्षेत्र डिंडौरी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग में पदस्थ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. विपिन राजपूत का नशा करते हुए कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में बीएमओ हाथ में वॉटल, चिलम और लाइटर लेकर धूम्रपान करते हुए दिखाई दे रहे हैं, हालांकि इस वीडियो की “जनधारा न्यूज” स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता हैं।
वहीं वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज पांडे ने कहा— “आपके द्वारा वीडियो वायरल की जानकारी दी गई है, वीडियो की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
गौरतलब है कि जिले में इन दिनों नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है और आज ही प्रभारी मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने नशामुक्ति को लेकर प्रचार-प्रसार किया है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के ही अधिकारी पर नशे में लिप्त होने का आरोप लगना पूरे अभियान की गंभीरता और साख पर सवाल खड़ा करता है।
जानकारी के अनुसार, डॉ. राजपूत के खिलाफ पूर्व में भी लापरवाही और अनुशासनहीनता की शिकायतें की जा चुकी हैं। ग्रामीणों ने उनके विरुद्ध कई बार आंदोलन और चक्काजाम तक किया, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। अब वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने फिर से बीएमओ को हटाने की मांग तेज कर दी है।
अब सबकी नजरें कलेक्टर डिंडौरी पर हैं कि वे इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। जिले में एक ओर जहां नशामुक्ति का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी का ‘कबीर सिंह’ वाला रूप चर्चा का विषय बन गया है।





