—सरपंच-सचिव पर रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाकर करोड़ों की गड़बड़ी के गंभीर आरोप….
डिंडौरी। ग्राम पंचायत जैसे लोकतंत्र के सबसे निचले पायदान पर यदि भ्रष्टाचार जड़ जमा ले, तो उसका सीधा असर सबसे कमजोर वर्ग पर पड़ता है। प्रधानमंत्री आवास जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं जब एक ही परिवार और रिश्तेदारों तक सीमित हो जाएँ, तो यह केवल अनियमितता नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय बन जाता है।
ताजा मामला डिंडौरी जिले के जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत परसेल में सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पिण्डरूखी, परसेल और हथकटा के ग्रामीणों ने कलेक्टर डिंडौरी को दिए गए शिकायती आवेदन में सीधे तौर पर सरपंच गुलाबवती कुशराम और सचिव पहलाद मरकाम को कटघरे में खड़ा किया है। आरोप है कि दोनों ने पंचायत को निजी जागीर बना लिया और शासकीय योजनाओं को अपने रिश्तेदारों व चहेतों तक सीमित कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में सरपंच-सचिव ने पारदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। तीनों ग्राम सभाओं में न तो हितग्राही सूची का वाचन किया गया और न ही पात्र परिवारों के नाम सार्वजनिक किए गए। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर अपने रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों के नाम से आवास स्वीकृत कर निर्माण कराया गया, जबकि जरूरतमंद आज भी इंतजार में हैं।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पंचायत में चल रहे सार्वजनिक निर्माण कार्यों में सरपंच और सचिव की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर आर्थिक गड़बड़ी की गई। उपसरपंच को ठेकेदारी देकर उन्हीं की ट्रैक्टर-जेसीबी मशीन से कार्य कराया गया और वास्तविक कार्य से कई गुना अधिक बिल पास कराकर सरकारी राशि का आहरण किया गया। जहां सीमित मुरूम और कम समय में खुदाई हुई, वहां कई गुना मात्रा और घंटों का भुगतान दिखाया गया।
ग्रामीणों ने मस्टर रोल में फर्जीवाड़े का भी गंभीर आरोप लगाया है। प्रभावशाली लोगों के परिजनों के नाम से हाजिरी भरकर भुगतान कराने की बात कही गई है। इससे मनरेगा और अन्य रोजगारपरक योजनाओं की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इतना ही नहीं, आवेदन में यह भी आरोप है कि सचिव ने अपने कार्यकाल के दौरान एक ही परिवार को एक से अधिक प्रधानमंत्री आवास दिलवाए और गौशाला भवनों के निर्माण में भी अपनों को फायदा पहुंचाया। इससे साफ संकेत मिलता है कि पंचायत स्तर पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि दो वर्षों से कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, लेकिन सरपंच-सचिव का ध्यान उन्हें पूरा कराने की बजाय कागजों में भुगतान कराने पर रहा। अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर सरपंच और सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायत में चल रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।
