भोपाल। लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश ने प्रदेश के सभी जिलों में पदस्थ आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों के मानदेय भुगतान में हो रही देरी को गंभीरता से लिया है। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि बजट उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कई जिलों में ऑपरेटरों को समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा, जिससे लगातार शिकायतें मिल रही हैं और मामला विधानसभा प्रश्न तक पहुंच गया है।
संचालनालय के अनुसार, मॉडल स्कूलों एवं उन्नयन शालाओं में कार्यरत आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए दिसंबर 2025 से जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 तक का बजट 15 जिलों को पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। शेष जिलों के लिए भी फरवरी 2026 तक बजट आवंटन का प्रावधान कर दिया गया है। इसके बाद भी भुगतान लंबित रहना नियम विरुद्ध बताया गया है।
पत्र में कहा गया है कि संबंधित एजेंसियों द्वारा मानदेय भुगतान में की जा रही देरी से ऑपरेटरों में असंतोष व्याप्त है। संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन एजेंसियों ने अब तक भुगतान नहीं किया है, उन्हें तत्काल पत्र जारी कर लंबित मानदेय का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।
साथ ही, सभी जिलों को यह भी निर्देशित किया गया है कि जिले में कार्यरत समस्त आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों की अद्यतन जानकारी—पदस्थ संस्था, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड विवरण, ब्लॉक एवं जिला सहित—07 दिवस के भीतर संचालनालय को भेजी जाए। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय-सीमा में जानकारी नहीं भेजने या भुगतान में देरी की स्थिति में संपूर्ण जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों की होगी। यह आदेश आयुक्त द्वारा अनुमोदित है और लोक शिक्षण संचालनालय ने साफ संकेत दिए हैं कि मानदेय भुगतान में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सोर्स:— लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश ।
