डिंडौरी। जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई स्थाई शिक्षा समिति की बैठकें यदि वर्षों तक न हों, तो यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के बच्चों के सपनों के साथ अन्याय बन जाता है। बता दें कि यहीं अन्याय मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के बच्चों के साथ हो रहा है।
दरअसल समनापुर विकासखंड में ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जिसने जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को चिंता में डाल दिया है। जब जनपद पंचायत समनापुर की उपाध्यक्ष नीतू लखन बर्मन ने भावुक शब्दों में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए पूर्व केंद्रीय राज्य कैबिनेट मंत्री एवं वर्तमान सांसद को पत्र लिखकर बताया कि स्थाई शिक्षा समिति की मासिक बैठक पिछले तीन वर्षों से आयोजित ही नहीं की गई। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि समिति की बैठकें न होने से शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा, स्कूलों की समस्याओं पर चर्चा और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी पूरी तरह ठप हो गई है। यह स्थिति ग्रामीण अंचल के उन बच्चों के लिए बेहद दुखद है, जो शिक्षा को ही अपने जीवन का सहारा मानते हैं।
उपाध्यक्ष बर्मन ने बताया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा न तो बैठकें कराई जा रही हैं और न ही समिति के सदस्यों एवं अध्यक्षों को कोई जानकारी दी जा रही है। इससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी कमजोर हो रही है और शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय बिना चर्चा के ही अधर में लटक गए हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि शिक्षा समिति केवल कागजों की औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह वह मंच है जहां गांव के स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, बच्चों की उपस्थिति, मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं की वास्तविकता पर विचार किया जाता है। लेकिन जब वर्षों तक बैठकें ही नहीं होंगी तो बच्चों के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?
जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इसका सबसे बड़ा नुकसान गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को होगा, जिनके लिए शिक्षा ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। नीतू लखन बर्मन ने सांसद से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर शिक्षा विभाग को निर्देश दें, ताकि स्थाई शिक्षा समिति की नियमित बैठकें पुनः शुरू हो सकें और समनापुर क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
वहीं इस पत्र के बाद अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया पर टिकी है। क्योंकि यह मामला केवल बैठकों का नहीं, बल्कि समनापुर के बच्चों के भविष्य और उनके उज्जवल कल का सवाल है। बरहाल आने वाले कुछ दिनों पता चलेगा कि जिला प्रशासन के द्वारा संबंधित विभाग के विरुद्ध कोई कार्रवाई करता है या फिर यूं ही शिक्षा विभाग का मनमानी चलता रहेगा..?




