डिंडौरी। प्रदेश कांग्रेस संगठन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से इन दिनों विभिन्न मोर्चा, प्रकोष्ठ एवं समितियों में व्यापक स्तर पर नियुक्तियां की जा रही हैं। इसी क्रम में 17 जनवरी को महिला उत्पीड़न निवारण प्रकोष्ठ की नवगठित प्रदेश प्रबंध समिति की सूची जारी की गई, जिसमें डिंडौरी जिले की एक कांग्रेस नेत्री को प्रदेश महासचिव के पद पर नियुक्त किया गया है।
लेकिन यह नियुक्ति सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार संबंधित नेत्री विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से किनारा कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में कांग्रेस संगठन द्वारा उन्हें प्रदेश स्तर की अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

नियुक्ति पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के लिए लगातार संघर्ष करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर ऐसे चेहरों को पद देना संगठनात्मक अनुशासन और निष्ठा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बिना स्थानीय नेतृत्व एवं जिला संगठन से राय-मशविरा किए इस प्रकार की नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है और कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हो रहा है। वहीं कांग्रेस संगठन के भीतर इस पूरे मामले को लेकर मंथन जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे विवादों का समाधान नहीं किया गया तो आगामी समय में इसका असर पार्टी की एकजुटता और चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है।




