डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के शहपुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मरवारी में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आवेदिका ऋतु बर्मन का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में अंकों और पात्रता की अनदेखी कर प्रभावशाली परिवार की महिला को लाभ पहुंचाया गया, जबकि अधिक अंक प्राप्त करने वाली गरीब बेटियों को चयन से वंचित कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार शिक्षक की पत्नी अर्पणा झारिया, जिन्हें मात्र 66.5 अंक प्राप्त हुए थे, को आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका पद पर नियुक्त कर दिया गया। वहीं इसी प्रक्रिया में 68 अंक प्राप्त करने वाली रितु बर्मन और 67.5 अंक वाली मेघा झारिया जैसी गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियां चयन से बाहर रह गईं। आरोप है कि चयन न होने के कारण ये बेटियां आज मजबूरी में घरों में काम करने को विवश हैं।

मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षक के परिवार के पास बीपीएल कार्ड मौजूद है। नियमों के अनुसार शासकीय कर्मचारी के परिवार का बीपीएल कार्ड बनना ही नहीं चाहिए, इसके बावजूद कथित रूप से संबंधित परिवार बीपीएल कार्ड के माध्यम से राशन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहा है। दूसरी ओर, वास्तविक रूप से गरीब परिवारों की बेटियां न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आवेदिका का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष होती और अंकों के आधार पर चयन किया जाता, तो अधिक अंक पाने वाली पात्र बेटियों को रोजगार मिलता। इस पूरे मामले ने महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




