डिंडौरी। आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम ऑनलाइन उपस्थिति रिपोर्ट में डिंडौरी जिले की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर पाई गई है। विगत महीनों में जहां डिंडौरी तीसरे और चौथे स्थान पर था, वहीं अब यह फिसलकर छठवें पायदान पर पहुँच गया है। नवीन रिपोर्ट के अनुसार जिले की उपस्थिति मात्र 77 प्रतिशत दर्ज हुई है, जो विभाग की निगरानी और कर्मचारियों की रुचि में लगातार कमी को दर्शाता है।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जिले में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लेकर अधिकारियों की अनदेखी सबसे बड़ी वजह बन रही है। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और संकुल प्राचार्यों के प्रोफाइल तक पूरी तरह अपडेट नहीं हैं और कई अधिकारी स्वयं भी नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे। उच्च स्तर की इस लापरवाही का सीधा प्रभाव शिक्षकों पर पड़ा है। पहले वेतन कटौती को लेकर जो अनुशासन था, वह कमजोर होता दिख रहा है और शिक्षकों की उपस्थिति लगातार कम होती जा रही है। डिंडौरी जिले में उपलब्ध 4382 शिक्षकों में से केवल 3363 ने ही 1 दिसंबर को उपस्थिति दर्ज की।
वहीं प्रदेश की रिपोर्ट पर नजर डालें तो नरसिंहपुर और भिंड 83 प्रतिशत उपस्थिति के साथ शीर्ष पर हैं। सिंगरौली 80, मंडला 79, सागर 78 और डिंडौरी 77 प्रतिशत के साथ छठे स्थान पर है। इसके नीचे आने वाले अधिकांश जिलों की उपस्थिति 70 प्रतिशत से भी कम पाई गई है। कुछ जिलों में तो स्थिति और भी खराब है और उपस्थिति 50 प्रतिशत से नीचे चली गई है। राज्य की कुल औसत उपस्थिति 56 प्रतिशत दर्ज हुई, जो पूरी व्यवस्था के कमजोर होते अनुशासन की ओर संकेत करती है।
वहीं शैक्षिक जानकारों का कहना है कि जब शीर्ष स्तर के अधिकारी ही ऑनलाइन उपस्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहे, तो निचले स्तर पर कर्मचारियों और शिक्षकों से बेहतर अनुशासन की उम्मीद करना कठिन है। विभाग को तत्काल प्रभाव से सख्त मॉनिटरिंग और जवाबदेही लागू करने की आवश्यकता है, ताकि EHRMS पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज करने में सुधार आ सके और जिले की रैंकिंग फिर से मजबूत स्थिति में लौट सके।




